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अल्मोड़ा में बेकाबू हुई जंगल की आग.. सेना के जवानों ने संभाला मोर्चा

अल्मोड़ा। वनाग्नि की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। कई जंगलों में आग ने विकराल रूप ले लिया है। आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग को सेना की मदद लेनी पड़ी। लगातार बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं ने वन विभाग के अफसरों व कर्मचारियों के माथे पर चिंता की लकीरे खड़ी कर दी है।

रानीखेत वन क्षेत्र के जागदेव बीट के जंंगलों में आग की घटना सामने आई। कुछ समय बाद आग ने पूरे जंगल को अपने चपेट में ले लिया। आग इतनी विकराल हो चुकी थी कि वन विभाग को सेना की मदद लेनी पड़ी। डीएम वंदना के निर्देश पर रानीखेत चौबटिया स्थित 27-पंजाब रेजीमेंट के 45 सैनिक व 14-डोगरा रेजिमेंट के 22 सैनिकों ने आग बुझाने के लिए मोर्चा संभाला। सेना व वन विभाग के कुल 110 से अधिक कर्मचारियों ने कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बता दे कि 4 दिन तक जंगल आग से धधकता रहा। इस दौरान प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव समेत अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

जंगलों में बढ़ती आग की घटनाएं अब प्रदेश सरकार के लिए भी चिंता का सबब बन गई है। हर वर्ष की भांति इस बार भी जंगलों में आग लगने का सिलसिला जारी है। वनों की आग की रोकथाम के लिए सरकार की ओर से हर साल योजनाएं तो बनाई जाती है लेकिन वह धरातल पर नहीं उतर पाती। वही, जंगलों में लगातार बढ़ रही भीषण आग पर सांसद अजय टम्टा ने चिंता जताई है। सांसद अजय टम्टा ने कहा कि चीड़ का पिरूल जंगलों में आग भड़कने का सबसे बड़ा कारण है। सरकार पिरूल से बिजली बनाने पर काम कर रही है।

लगातार बढ़ रहे तापमान से आग की घटनाएं बढ़ने की संभावना है। फायर सीजन में अभी करीब दो महीने का समय बाकी है। सवाल एक है कि सीमित संसाधनों वाला विभाग आग की घटनाओं पर कैसे काबू पायेगा।

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