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चिलचिलाती धूप में स्वागत के लिए लाइनों में खड़े कर दिए स्कूली बच्चे, क्योंकि सूबे के सीएम धामी आ रहे थे

अल्मोड़ा। हेलीकॉप्टर व लक्जरी कारों से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने वाले वीआईपी व वीवीआईपी (VIP and VVIP) के स्वागत के​ लिए अकसर स्कूली छात्रों को सड़कों पर खड़ा कर दिया जाता है। ऐसा ही कुछ नजारा शनिवार को जागेश्वर धाम में देखने को मिला। चिलचिलाती धूप में सड़कों के दोनों ओर नौनिहालों को सिर्फ इसलिए खड़ा कर दिया कि सूबे के सीएम पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) आ रहे थे। मासूम बच्चों को इस तरह चिलचिलाती व कड़ी धूप में खड़ा कर शिक्षा विभाग सीएम का कौन सा स्वागत करना चाह रहा था, यह समझ से परे है।

दरअसल, शनिवार को श्रावणी मेले के उद्धाटन को लेकर सीएम धामी जागेश्वर पहुंचे। सीएम के कार्यक्रम को लेकर सभी आलाअधिकारी कार्यक्रम स्थल पर मुस्तैद थे।​ शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सीएम के स्वागत के लिए आस पास क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 600 से अधिक छात्र-छात्राओं को भी जागेश्वर धाम लाया गया था। सभी छात्र सीएम धामी के स्वागत के लिए जागेश्वर मंदिर से करीब आधा किमी दूरी पहले से मंदिर तक सड़कों के दोनों ओर खड़े कर दिए गए थे। सीएम के पहुंचने से पहले दोपहर के करीब 12 बजे की चिलचिलाती धूप से न सिर्फ छात्र-छात्राएं परेशान नजर आए बल्कि अधिकारी भी धूप से बचते नजर आए। ऐसे में कोई अधिकारी दुकान तो कोई टैंट के नीचे सिर छुपाते नजर आए। लेकिन सड़क के किनारों पर धूप में खड़े बच्चों पर किसी भी जिम्मेदार की नजर नहीं गई।

अभी कुछ माह पहले एक आश्रम में हुए एक कार्यक्रम के दौरान भी यही नजारा देखने को मिला था। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने आश्रम के कार्यक्रम में शिकरत की थी। इस कार्यक्रम में भी आस पास के स्कूलों के छोटे-छोटे बच्चों को कार्यक्रम स्थल ले जाया गया था। जहां कार्यक्रम के दौरान नौनिहालों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। सवाल यह है कि अगर मासूम बच्चों को सड़क पर खड़ा करने से किसी वीआईपी या वीवीआईपी का सम्मान हो रहा है तो राजनीतिक पार्टियों के नेता इस प्रथा के तहत अपने बच्चों को सड़क के किनारों पर खड़ा क्यों नहीं करते। वही, अभिभावक भी इस मामले का दबी जुबान विरोध तो करते है लेकिन अपने पाल्यों के अधिकारों के लिए कोई भी अभिभावक खुलकर सामने नहीं आता।

वीआईपी व वीवीआईपी के दौरे के दौरान स्कूली छात्रों से राजनीतिक कार्यक्रम स्थल पर भीड़ बढ़ाना व उन्हें सड़क पर खड़ा करना न सिर्फ बच्चों को ​कठिनाई पैदा करता है बल्कि शिक्षा का अधिकार व बच्चों के नैसर्गिक अधिकार का उल्लंघन करता है। यह सरकार व शिक्षा विभाग की असंवेदनशीलता का प्रमाण है, जिसे गंभीरता से देखे जाने की जरूरत है।

इस मामले में जब शिक्षा विभाग के मुखिया मुख्य शिक्षा ​अधिकारी सुभाष चंद्र भट्ट से पूछा गया तो उन्होंने मामला उनके संज्ञान में नहीं होने की बात कही। हैरानी की बात तो यह है कि सीईओ सुभाष चंद्र भट्ट ने कहा कि इस मामले में उनसे नहीं पूछा गया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कार्यक्रमों में या फिर स्वागत में सड़कों के किनारों में छात्र-छात्राओं को इस तरह खड़ा करना गलत है। इससे छात्र-छात्राओं के पठन पाठन में बाधा उत्पन्न होती है। हालांकि, शनिवार को हरेला पर्व के चलते सरकारी विद्यालयों में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया था। सीईओ भट्ट ने कहा कि इस मामले में वह उच्च अधिकारियों से बातचीत करेंगे।

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