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कलेजे के टुकड़े की मौत से परिजनों में कोहराम, 5 घंटे बाद पहुंची वन महकमे की टीम, विधायक भी मौके पर

इंडिया भारत न्यूज़ डेस्क(IBN): जरा सोचिये, उस मां-बाप पर क्या बीतती होगी, जिनके जिगर के टुकड़े को गुलदार ने निवाला बना लिया हो। अभी पौड़ी जिले के पाबौ ब्लॉक के निसणी गांव की घटना को 2 दिन बीते नहीं थे कि अल्मोड़ा में 8 वर्षीय मासूम को गुलदार ने मार डाला। अपने इकलौते बेटे की मौत से जहां मां का रो रो कर बुरा हाल है, वही, पिता के आंखों के आंसू भी थम नहीं रहे है। गांव में गम व दहशत का माहौल है। इस दर्दनाक घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है।

घटना गुरुवार शाम करीब साढ़े 5 बजे की है। अल्मोड़ा जिले के भनोली तहसील के नैलपड़ गांव के क्वेराली तोक निवासी रमेश बोरा का 8 वर्षीय इकलौता बेटा आरव पड़ोस में रहने वाले अपने ताऊ के घर से अपने घर की ओर आ रहा था। आरव ने घर की कुछ सीढ़ियां चढ़ी ही थी कि घात लगाये गुलदार ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया। पास में किसी व्यक्ति ने गुलदार को आरव पर हमला करते देख लिया। गुलदार आरव को आंगन से कुछ दूरी तक घसीट भी ले गया लेकिन लोगो के चिल्लाने पर गुलदार आरव को छोड़कर वहां से जंगल की ओर भाग गया। पास में खड़े लोग दौड़ कर आरव के पास पहुंचे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आरव की मौके पर मौत हो गयी।

दिल को दहला देने वाली इस घटना के बाद परिजनों पर दुखो का पहाड़ सा टूट गया। आरव की माँ कविता बोरा अपने कलेजे के टुकड़े की मौत के बाद रो बिलख रही है। हमेशा हमेशा के लिए अपने लाडले को खो देने वाली मां बस एक ही रट लगाये है कि ‘उसका आरव उसे लौटा दो’।

तीन भाई बहनों में सबसे बड़ा था आरव

तीन भाई बहनों में आरव सबसे बड़ा था। उसकी दो छोटी बहने हैं। जिसमे एक बहन कक्षा 1 तो दूसरी बहन आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ती है। आरव राजकीय प्राथमिक विद्यालय नैनी में तीसरी कक्षा का छात्र था। आरव के पिता रमेश बोरा गांव में ही मेहनत मजदूरी करते है।

घटना के 5 घंटे बाद गांव पहुंची वन विभाग की टीम

नैलपड़ गांव के तोक क्वेराली में करीब साढ़े 5 बजे यह घटना घटित हुई। लेकिन वन विभाग की टीम 5 घंटे बाद गांव पहुंची। रात करीब साढ़े 10 बजे प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी, कनारीछीना शंकर दत्त कांडपाल अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे। जिस पर ग्रामीणों ने आक्रोश भी जताया। हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से तहसीलदार भनोली बर्खा जलाल, नायब तहसीलदार दीवान सिंह सलाल व राजस्व उपनिरीक्षक भगरतोला चंद्र सिंह राठौर घटना के कुछ देर बाद गांव पहुंच गए थे।

विधायक मेहरा ने गांव पहुंचकर परिजनों को बंधाया ढांढस

घटना की सूचना पर क्षेत्रीय विधायक मोहन सिंह मेहरा तत्काल गांव पहुंचे। जहां उन्होंने मृतक के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढाढस बंधाया। इस दौरान विधायक मेहरा ने डीएम से फ़ोन पर बातचीत कर मृतक के पोस्टमार्टम की कार्रवाई पीएचसी नैनी में करने को कहा। विधायक ने वन विभाग की ओर से तात्कालिक सहायता के रूप में 1 लाख रुपए का चेक मृतक के परिजनों को सौंपा। वही, विधायक की मौजूदगी में ग्राम प्रधान मोहन सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से गांव में पिंजरा लगाने की मांग की।

मानव और वन्यजीवों के मध्य टकराव की स्थिति चिंताजनक

उत्तराखंड में मानव और वन्यजीवों के मध्य टकराव चिंताजनक स्थिति में पहुंच गयी है। पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्र तक सभी वन्यजीवों के आतंक से कांप रहे हैं। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में तो वन्यजीवों विशेषकर गुलदार के आंतक के चलते दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है। यहां न खेत-खलिहान सुरक्षित हैं और न घर-आंगन। कब कहां मौत रूपी गुलदार, भालू जैसे जानवर सामने आ धमकें कहा नहीं जा सकता। इसके बाद भी इसके समाधान को प्रभावी पहल का अभी तक इंतजार है। यह स्थिति तब है, जब राज्य में होने वाले प्रत्येक चुनाव में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बड़े मुद्दे के रूप में रहता है। फिर भी इसके निवारण को वह राजनीतिक इच्छाशक्ति अब तक नहीं दिखाई दी, जिसकी दरकार है। आने वाले चुनावों में एक बार फिर राजनीतिक दल जनता की चौखट पर दस्तक देंगे। वे विकराल होती इस समस्या के निवारण को वादे भी करेंगे।

 

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