नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की संयुक्त सचिव नमिता प्रसाद द्वारा नई दिल्ली में टीईआरआई के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान हिम-कनेक्ट कार्यक्रम की पूर्व तैयारियों का निरीक्षण किया गया।
नमिता प्रसाद ने कहा कि यह हिमालय पर शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं को एक साथ लाने की पहल है, ताकि सहयोग, प्रायोगिक परियोजनाओं और वित्तपोषण माध्यमों को सुगम बनाया जा सके। उन्होंने हर तकनीक और मॉडल की वैज्ञानिक प्रमाणिकता को जॉचा और कहा कि मौलिक अनुसंधानों को आगे बढ़ाने की इस परम्परा को हमें और मजबूत करना होगा।
आगामी 27 फरवरी तक नई दिल्ली के ताज पैलेस होटल में आयेजित इस कार्यक्रम में भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) में कार्यरत शोधकर्ताओं को स्टार्टअप, निवेशकों और नीति निर्माताओं से जोड़ना है, ताकि उनके शोध परिणामों को व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके। यह सम्मेलन 27 फरवरी तक आगंतुकों के लिए खुला रहेगा।
मंत्रालय के राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन (एनएमएचएस) के तहत भारतीय हिमालयी क्षेत्र में विकसित 24 से अधिक प्रौद्योगिकियों, प्रोटोटाइपों, पेटेंटों और प्रायौगिक परियोजनाओं को हिम-कनेक्ट के दौरान प्रदर्शित किया जा रहा है। कार्यक्रम में 100 से अधिक स्टार्टअप, इनक्यूबेटर, निवेशक और नीति निर्माता शामिल हैं।
इन 24 अनुसंधानकर्ताओं में आईआईटी (गुवाहाटी, रुड़की, जोधपुर, जम्मू, रोपड़ और मंडी), सीएसआईआर संस्थान (सीआरआरआई और आईएचबीटी), केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल, एनआईटी (सिलचर और अरुणाचल प्रदेश), एसकेयूएएसटी-के, कश्मीर विश्वविद्यालय, टीईआरआई-गुवाहाटी, कुमाऊं विश्वविद्यालय और जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (एनआईएचई) सहित अन्य प्रमुख संस्थान शामिल हैं। पर्यावरण अनुकूल सड़क निर्माण, हाइड्रोपोनिक खेती के लिए उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग, रेशम उत्पादन अपशिष्ट को जलन निवारक मलहम में परिवर्तित करना, कम लागत वाले खनिजयुक्त जल शोधक, चीड़ की पत्तियों पर आधारित अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली, हिमालय के लिए विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल शोधक प्रणाली के साथ और याक के दूध से बने पनीर प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। विज्ञान को निवेश और नीति के साथ जोड़कर, हिम-कनेक्ट हिमालय से लेकर विश्व तक जलवायु परिवर्तन के प्रति सुदृढ़ता, हरित विकास और सतत विकास को गति प्रदान करना चाहता है।
यह जानकारी देते हुए एनएमएचएस के नोडल अधिकारी इं. महेन्द्र सिंह लोधी ने बताया कि यहां उत्तराखण्ड से बिच्छू घास के खाद्य उत्पाद, चीड़ पत्ती से शोधन प्रणाली व दूषित उपचारित जल में हाइड्रोपोनिक प्रणाली से सब्जी उगाने ,देव रिंगाल के उत्पाद व प्लास्टिक से ग्राफीन बनाने के नवाचार मॉडल इस प्रदर्शनी में पहुंच गए हैं।
इस अवसर पर माउंटेन डिविजन की प्रमुख डॉ सुजेन जार्ज, अनुभाग अधिकारी नीरजा शर्मा, पर्यावरण संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक व प्रभारी निदेशक डॉ आई.डी. भट्ट, डॉ. प्रतीक्षा जोशी सहित टेरी के अनेक विशेषज्ञ, पुनीत सिराड़ी, रिया गोस्वामी, प्रतिभा बिष्ट, प्रबल कुमार और राहुल पाण्डे आदि मौजूद रहे।
India Bharat News Latest Online Breaking News