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कैंची धाम में ‘जाम’ से हाहाकार, दावों और धरातल के बीच पिसती जनता, सरकार व सिस्टम बेपरवाह

-कैंची धाम की चमक के पीछे अंधेरे में पहाड़ का भविष्य
-अधूरा बाईपास, विकास या चुनावी झुनझुना

 

​इंडिया भारत न्यूज डेस्क: सरकारी फाइलों में पर्यटन को रीढ़ बताने वाली सरकार ने अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे को ‘यातना का गलियारा’ बना दिया है। रविवार को कैंची धाम के पास दोनों ओर से लगा लंबा जाम इस बात का सबूत है कि प्रशासन केवल वीआईपी दौरों के लिए जागता है, आम जनता और मरीजों के लिए नहीं।

सप्ताह का हर दिन खासकर वीकेंड (शनिवार व रविवार) का दिन अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे पर एक दुःस्वप्न बन चुका है। कैंची धाम में उमड़ रही भीड़ और वाहनों के बेतरतीब दबाव ने पूरी व्यवस्था को घुटनों पर ला दिया है। लंबे जाम में फंसे यात्री, बिलखते मरीज और सरकार व सिस्टम की सुस्ती अब पहाड़ के धैर्य की परीक्षा ले रही है।

 

पुलिस प्रशासन के सोशल मीडिया पेज भारी-भरकम ट्रैफिक प्लान और दावों से भरे रहते हैं, लेकिन धरातल पर खाकी केवल तमाशबीन बनी नजर आती है। सड़क पर रेंगते वाहनों के बीच नैनीताल जिला प्रशासन व पुलिस का मैनेजमेंट पूरी तरह से चौपट है। सवाल यह है कि यह पता होने के बाद भी की वीकेंड में भीड़ होगी, तो क्या प्रशासन किसी चमत्कार का इंतजार करता है?

 

रविवार 12 अप्रैल के दिन भी कैंची धाम समेत अल्मोड़ा हल्द्वानी हाइवे में जगह-जगह धरातल पर मंजर कुछ ऐसा ही था। कैंची धाम से कई किलोमीटर आगे और पीछे वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।​ हाईवे किनारे बेतरतीब ढंग से पार्क किए गए वाहनों से पहाड़ की ओर से हल्द्वानी की ओर जा रहे वाहन एक-एक कर फंसते चले गए। देखते ही देखते वाहनों की कतार लगती चली गई।

 

अल्मोड़ा से हल्द्वानी की ओर जाने वाले वाहनों का कैंची की तरफ से जाना मजबूरी है। कैंची से न जाने पर अगर वाहन रामगढ़ की तरफ से जाते हैं तो भी उन्हें भवाली से आगे भीमताल से रानीबाग तक जाम ही झेलना है। यही हाल रानीखेत की तरफ से मैदान जाने वाले वाहनों का है। यहां से जाने वाले लोगों को हर हाल में कैंची, भवाली, भीमताल, रानीबाग के जाम का सामना करना ही है। पिथौरागढ़ के वाहन अगर धानाचूली होते हुए हल्द्वानी की तरफ जाते हैं तो खुटानी के बाद भीमताल में प्रवेश करते ही जाम उन्हें परेशान करने के लिए तैयार रहता है।

 

वीकेंड पर वाहनों का दबाव बढ़ने से ही कैंची धाम के पास जाम एक बड़ी समस्या बन गया है। अधिकारियों के बयान केवल अखबार की सुर्खियां बनते हैं, सड़कों पर जनता पसीने से तर-बतर और बेहाल नजर आती है। जहां आम आदमी घंटों जाम में सिसकता है, वही वीआईपी के वाहन हूटर बजाते हुए निकल जाते हैं।

 

बाईपास का इंतजार, कब खत्म होगा अधूरा वादा

​सरकार और विभाग लंबे समय से कैंचीधाम बाईपास (सैनिटोरियम-रातिघाट) निर्माण का राग अलाप रहे हैं। दावे किए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा और यातायात सुचारू होगा, लेकिन हकीकत यह है कि बाईपास का निर्माण कार्य अभी भी अधूरा है। जब तक मुख्य हाईवे पर दबाव कम करने के लिए ठोस विकल्प नहीं मिलते, तब तक कैंची धाम का यह ट्रैफिक टॉर्चर खत्म होने वाला नहीं है।

 

पहाड़ का पर्यटन व्यवसाय हुआ धड़ाम

जाम की वजह से अल्मोड़ा समेत रानीखेत, कौसानी, बागेश्वर, पिथौरागढ़ का पर्यटन कारोबार आईसीयू में पहुंच गया है। पर्यटक अब पहाड़ों की ओर आने के नाम से ही तौबा कर रहे हैं। पहाड़ आने पर्यटक रास्ते से ही वापस लौटने को मजबूर हैं, जिससे इन जिलों का पर्यटन कारोबार पूरी तरह चौपट होने की कगार पर है। अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे अब महज एक सड़क नहीं, बल्कि अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है। अगर सरकार ने जल्द ही बाईपास का कार्य पूरा कर कड़े ट्रैफिक नियम लागू नहीं किए, तो वह दिन दूर नहीं जब पहाड़ का पर्यटन पूरी तरह दम तोड़ देगा और आम आदमी का सफर केवल संघर्ष बनकर रह जाएगा।

 

​मरीजों के लिए काल बनता हाईवे

​सबसे डरावनी स्थिति एम्बुलेंस और गंभीर मरीजों के लिए बनी हुई है। पर्वतीय जिलों से हल्द्वानी रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए यह जाम ‘लाइफ एंड डेथ’ का सवाल बन गया है। घंटों जाम में फंसे रहने के कारण मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे किसी भी वक्त बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।

 

सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि केवल बयानबाजी से जाम नहीं खुलेगा। कैंची धाम में जिस तरह दिन पर दिन भीड़ बढ़ रही है, वहां की मूलभूत सुविधाओं और सड़कों का विस्तार युद्धस्तर पर होना चाहिए। अगर जल्द बाईपास का काम पूरा नहीं हुआ और ट्रैफिक का ठोस विकल्प नहीं निकला, तो जनता का यह गुस्सा सड़कों पर फूटने में देर नहीं लगाएगा।

 

अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे पर कैंची धाम व अन्य जगहों पर घंटों लग रहे लंबे ट्रैफिक जाम के कारण पर्यटकों ने अल्मोड़ा का रुख करना कम कर दिया है। अल्मोड़ा का व्यापार पूरी तरह से इस हाईवे पर निर्भर है। अगर पर्यटक कैंची धाम और भवाली में ही घंटों फंसा रहेगा, तो वह अल्मोड़ा तक पहुँच ही नहीं पाएगा। अल्मोड़ा के पर्यटन कारोबार में 50 फीसदी तक की भारी गिरावट आ चुकी है, जिससे सभी व्यापारी बेहद परेशान हैं। सरकार व प्रशासन को शीघ्र यातायात प्रबंधन के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए।
   -अरुण वर्मा, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन अल्मोड़ा।

 

कैंचीधाम में श्रद्धालुओं व पर्यटकों की बढ़ती भीड़ से हो रही अव्यवस्था का हल निकालने में सरकार पूरी तरह असफल साबित हुई है। इससे निपटने के लिए सरकार के पास कोई नीति नहीं है। जिससे पर्वतीय जिलों की स्थिति दयनीय हो चुकी है। सरकार इस मुद्दे पर न तो गंभीर नजर आ रही है और न ही इसका कोई हल निकालने की स्थिति में है। सरकार को चाहिए की वह हाई लेवल कमेटी गठित कर इस समस्या का शीघ्र समाधान करे। ताकि पहाड़ की जनता व बाहर से आने वाले पर्यटकों को राहत मिल सके।
   -पी.सी. तिवारी, अध्यक्ष, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी।

 

कैंची धाम पूरे देश का आस्था का केंद्र बना हुआ है। देशभर से श्रद्धालु वहां पहुंच रहे है।पिछले कुछ सालों से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसलिए उसका वैकल्पिक मार्ग खोजा गया है। कैंचीधाम बाईपास का काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही यह बाईपास बनकर तैयार हो जाएगा। अगले एक-दो माह में पार्किंग भी बनकर तैयार हो जाएगी। जिससे बाद इस समस्या से काफी हद तक राहत मिलेगी।
   -अजय टम्टा, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री।

 

वीकेंड पर कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या उम्मीद से कई गुना अधिक बढ़ गई है, जिससे यातायात का दबाव अत्यधिक रहा। हमने हाईवे पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की है। सड़कों के संकरा होने और पार्किंग क्षमता सीमित होने के कारण कुछ स्थानों पर गति धीमी हुई है। बाईपास का काम पूरा होते ही पहाड़ से हल्द्वानी आने जाने वालों की यह समस्या हल हो जाएगी। नई पार्किंग के निर्माण के बाद कैंचीधाम आने वाले वाले श्रद्धालुओं को भी राहत मिलेगी।
    -जगदीश चंद्र, एसपी ट्रैफिक, नैनीताल।

 

 

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