अल्मोड़ा: उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की हड़ताल जारी है। अभियंता सड़कों पर हैं। बैठकों का दौर जारी है। और सरकार के खिलाफ नाराजगी साफ दिख रही है।
रानीखेत में लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में हुई बैठक में इंजीनियर्स ने स्पष्ट रूप से कहा की जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, काम पर वापसी नहीं होगी। अल्मोड़ा मुख्यालय में शक्ति सदन में बड़ी संख्या में अभियंता जुटे।लोक निर्माण, सिंचाई, ग्रामीण निर्माण लगभग हर विभाग के इंजीनियर्स इस आंदोलन में एकजुट नजर आए।
रानीखेत में लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में आयोजित बैठक की अध्यक्षता शेखर पाण्डेय ने की, जबकि संचालन कमल साह द्वारा किया गया। बैठक में विभिन्न विभागों के डिप्लोमा इंजीनियर्स ने कार्यों का बहिष्कार जारी रखते हुए कहा कि अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है, जिससे अभियंताओं में रोष बढ़ता जा रहा है।
अल्मोड़ा शक्ति सदन में भी आंदोलन के तीसरे दिन बड़ी संख्या में अभियंता एकत्र हुए। बैठक की अध्यक्षता प्रदीप जोशी ने की। इस दौरान लोक निर्माण, सिंचाई, ग्रामीण निर्माण, आवास, कृषि, जिला पंचायत, उरेडा, शहरी विकास और पीएमजीएसवाई समेत कई विभागों के अभियंताओं ने भाग लिया और एकजुटता दिखाई।
अभियंताओं का कहना है कि उनकी 27 सूत्रीय मांगों में एसीपी के तहत 5400, 6600 और 8700 ग्रेड पे, अभियंत्रण विभागों में न्यूनतम तीन पदोन्नति, पेयजल एवं जल संस्थान का राजकीयकरण, पुरानी पेंशन बहाली, आईटी भत्ता, फील्ड स्टाफ की नियुक्ति और गैर-तकनीकी कार्यों से मुक्ति जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।
महासंघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा, भले ही इसका असर विकास कार्यों पर क्यों न पड़े।
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