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हाजिरी एडवांस, शिक्षक स्कूल से गुल! उत्तराखंड में यहां सहायक अध्यापक सस्पेंड

-उप शिक्षा अधिकारी की प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया पाये गये दोषी
-सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का शिक्षा मंत्री ने लिया संज्ञान

 

देहरादून: शिक्षा विभाग में कुछ शिक्षक-कर्मचारी अनुशासन को ताक पर रखकर विभाग की छवि धूमिल करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में अब सरकार आरोपी कार्मिकों को किसी भी सूरत में बख्शने के मूड़ में नहीं है। जिले के चकराता विकासखण्ड के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक विद्यालय डिरनाड़ में तैनात सहायक अध्यापक हरपाल सिंह के खिलाफ विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें निलम्बित कर दिया गया है।

 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और ग्रामीणों की शिकायत पर उप शिक्षा अधिकारी चकराता द्वारा की गई जांच में उक्त शिक्षक बिना कोई अवकाश स्वीकृत कराये विद्यालय से अनुपस्थित पाये गये साथ ही पूर्व से ही उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर करने के भी दोषी पाये गये। जिसके आधार जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर बीईओ कार्यालय चकराता में सम्बद्ध कर दिया है।

 

हरपाल सिंह प्रकरण में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने प्रकरण की तत्काल जांच के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। उप शिक्षा अधिकारी चकराता द्वारा की गई जांच में प्रथम दृष्टया सहायक अध्यापक हरपाल सिंह दोषी पाये गये।

जांच रिपोर्ट में गत 06 एवं 07 अप्रैल को हरपाल सिंह बिना किसी पूर्व अनुमति के विद्यालय से अनुपस्थित पाए गए। साथ ही, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो एवं स्थानीय ग्रामवासियों की शिकायतों सही पाई गई।

 

जांच के दौरान यह भी पाया गया कि आरोपित शिक्षक द्वारा पूर्व में ही उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर दर्ज किये और विद्यालय से गयाब रहे। उक्त आरोपों को लेकर शिक्षक से स्पष्टीकरण लिया गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।

 

उप शिक्षा अधिकारी की संस्तुति के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) द्वारा हरपाल सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। इसके साथ ही डीईओ बेसिक ने खंड शिक्षा अधिकारी चकराता को जांच अधिकारी नियुक्ति प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश दिये। साथ ही सभी पक्षों की सुनवाई कर 30 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा।

 

शिक्षा विभाग में अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतेगा या विभाग की छवि को धूमिल करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विद्यालयों में नियमित निरीक्षण के लिये सभी जिलों के सीईओ को निर्देश दे दिये गये हैं, ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बनी रहे।
-डाॅ. धन सिंह रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

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