नियमों को ताक पर रखकर छलनी किए जा रहे बेशकीमती चीड़ के पेड़, वनकर्मियों की मिलीभगत से ठेकेदार अवैध तरीके से कर रहे लीसा दोहन
अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय से सटी वन पंचायतों में लंबे समय से अवैध तरीके से लीसा दोहन का खेल चल रहा है। हैरत की बात यह है कि मुख्यालय से महज चार से पांच किमी की दूरी पर ठेकेदार विभागीय नियमों व निविदा की शर्तों को ठेंगा दिखाते हुए बेशकीमती चीड़ के पेड़ों से लीसा दोहन कर रहे है। ऐसे में साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूरस्थ इलाकों में जंगलों की क्या स्थिति होगी। मनमाने तरीके से जिस तरह चीड़े के पेड़ों को नियमविरूद्ध छलनी किया जा रहा है उससे इस खेल में विभागीय कर्मियों की मिलीभगत की भी पूरी आशंका है।
चीड़ के पेड़ों से लीसा निकालने के लिए वन विभाग के कुछ नियम व शर्तें है। विभाग द्वारा नियमों के तहत ही लीसा दोहन कराने के दावे किए जाते हैं। लेकिन जिला मुख्यालय से लगी खत्याड़ी, बड़सीमी, चौसली, देवली के वन पंचायतों में धरातल पर स्थिति कुछ और है। यहां ठेकेदारों व मेटों द्वारा विभाग के दावों को पलीता लगाते हुए धड़ल्ले से लीसा दोहन किया जा रहा है।
इन वन पंचायतों में विभाग ने लीसा निकालने का ठेका दिया है, लेकिन इन पंचायतों में धड़ल्ले से मानकों की अनदेखी हो रही है। अनुमति से अधिक पेड़ों पर एक से अधिक घाव, लीसा निकालने को सैकड़ों पेड़ों को चारों तरफ से घाव लगाए गए हैं। यही नहीं विभाग द्वारा निर्धारित गोलाई से कई अधिक छोटे पेड़ों से लीसा निकाला जा रहा है। कुछ जगह ग्रामीणों और राजस्व विभाग की अनुमति के बगैर नाप भूमि में लीसा दोहन किया जा रहा है। सड़क से दस मीटर की दूरी का भी पालन नहीं किया गया है। जंगल डिपो में रखे गए टिनों में कोई क्रमांक नहीं चढ़ाए गए है। इन जंगलों की हालत को देखकर कह सकते हैं कि विभाग द्वारा निर्धारित किसी भी एक शर्त का ठेकेदार पालन नहीं कर रहे हैं। अधिक मुनाफे के लालच में पेड़ों को जिस निर्ममता से खरोंचा गया है, आग लगने के दौरान पेड़ों का अस्तित्व ही समाप्त होने की आशंका है।
पंचायती और जंगलात विभाग के चीड़ वनों में मानक में आने वाले पेड़ों से लीसा विदोहन वन विभाग और वन पंचायत दोनों के लिए आमदनी का अच्छा स्रोत है। लीसा निकालने को वन विभाग के नियम व शर्तें तय हैं, ताकि वैज्ञानिक तरीके से लीसा विदोहन से अधिक राजस्व तो मिले साथ ही लीसा निकालने से पेड़ों के अस्तित्व पर संकट नहीं आए। ठेकेदार नियमावली व शर्तों के तहत लीसा निकालने को बाध्य होते हैं। ठेकेदारों से निर्धारित मानकों के मुताबिक लीसा गड़ान कराना विभाग द्वारा तैनात फारेस्ट गार्ड, अनुभाग अधिकारी, वन दरोगा, रेंजर आदि की जिम्मेदारी है। कर्मचारी और अधिकारियों की हीलाहवाली या मिलीभगत के बिना जंगल में अवैध लीसा नहीं निकाला जा सकता है। लेकिन अब मामला उच्च स्तरीय अफसरों तक पहुंचने के बाद विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों व ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।
उप वन संरक्षक, वन प्रभाग अल्मोड़ा दीपक सिंह ने कहा कि, जिला मुख्यालय के आसपास वन पंचायतों में लीसा निकालने में नियमों की अनदेखी की शिकायत मिली है। विभाग द्वारा इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। निविदा शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार और वन पंचायत पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। और यदि संख्या अधिक मात्रा में पाई जाती है तो ठेकेदार और वन पंचायत को ब्लैक लिस्ट कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्य के लिए जिम्मेदार वन कर्मियों की मिली भगत, संलिप्तता, उदासीनता की भी जांच की जाएगी। भविष्य में ऐसी गतिविधियां दोबारा प्रकाश में न आए इसलिए मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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