नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग में कुछ साल पहले तक तैनात छेड़छाड़ के आरोपी दानिक्स (दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दमन एवं दीव तथा दादरा और नगर हवेली सिविल सर्विसेज) अधिकारी ए वी प्रेमनाथ को समय से पहले सेवानिवृत्त कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बारे में जारी आदेश को मुख्य सचिव नरेश कुमार को भेज दिया है। आदेश के अनुसार, तत्काल प्रभाव से तीन महीने का वेतन और भत्ते दिए जाने के निर्देश दिए हैं। जिस पर दिल्ली सरकार ने प्रेमनाथ को सोमवार को इस राशि का चेक भी जारी कर दिया, जिसमें उन्हें चार लाख छह हजार 830 रुपये जारी कर दिए गए हैं।
गृह मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि वह प्रेमनाथ को सार्वजनिक हित में सेवा से सेवानिवृत्त करने के लिए मौलिक नियमों के नियम 56 (जे) के उप-नियम 1 और सीसीएस (पेंशन) नियम 1965 के नियम 42 द्वारा प्रदत्त अपनी शक्तियों का प्रयोग कर रहा है। नियमों के अनुसार, केंद्र सरकार को सार्वजनिक हित में ईमानदारी की कमी और अप्रभावीता के आधार पर सरकारी अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त करने का पूर्ण अधिकार है।
प्रेमनाथ के खिलाफ कुल पांच एफआइआर दर्ज हैं, जिनमें दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रविधानों के तहत एक एफआईआर भी शामिल है।
अल्मोड़ा में दर्ज हुआ था पॉक्सो का मुकदमा
‘दानिक्स’ (DANICS) अधिकारी ए वी प्रेमनाथ के खिलाफ साल 2021 में नाबालिग से दुष्कर्म का प्रयास व छेड़छाड़ के आरोप में अल्मोड़ा में मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसके बाद रानीखेत क्षेत्र से उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इसी वजह से वह अब तक निलंबित थे। प्रेमनाथ के दोनों हाथ नहीं होने के चलते पिछले साल दिसंबर माह में नैनीताल हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।
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