अल्मोड़ा: वन बीट अधिकारियों के हड़ताल में जाने से वन महकमे की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। आंदोलनकारी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं है। कर्मचारियों ने कहा कि वें कोरे आश्वासन में नहीं आने वाले है। सकारात्मक कार्यवाही होने व मांग पूरी होने पर ही आंदोलन को समाप्त किया जाएगा।
गुरुवार को हड़ताल के आठवें दिन भी वन आरक्षी अपनी मांगों को लेकर धरने पर अड़े रहे। आंदोलनस्थल पर कर्मचारियों ने मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। वन सेवा नियमावली 2016 को पूर्व की भांति लागू करने, दस साल की सेवा पूरी कर चुके वन आरक्षियों को पदोन्नति देने समेत अन्य मांगों पर कार्यवाही करने की मांग की है। धरनास्थल पर वक्ताओं ने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं में वन आरक्षी पहली पंक्ति में खड़ा होकर अपनी भूमिका का निर्वहन करता है। लेकिन सालों से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। शासन व सरकार को चाहिए की वह शीघ्र मांगों पर उचित कार्यवाही करें। उधर, कई कर्मचारी वन प्रभाग कार्यालय में अटैच है। कर्मचारियों के हड़ताल में जाने से विभागीय कार्य भी प्रभावित हो रहे है।
प्रदर्शन में अध्यक्ष बलवंत भंडारी, जिला उपाध्यक्ष किशोर चंद्र, कोषाध्यक्ष रोशन कुमार, महिला उपाध्यक्ष पूनम पंत, विवेक तिवारी, दलीप सिंह, दीप चंद्र, मनोज कांडपाल, नंदाबल्लभ जोशी, महेश चंद्र, लोकेश कुमार, कुंदन सिंह, महेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, दीपा मिश्रा, अरविंद प्रसाद, पवन कुमार, हिम्मत सिंह बोरा, महेंद्र सिंह मटेला, दीवान सिंह ढैला, कविता मेहता, गौरव पंत, विजय सिंह बिष्ट, बबीता नेगी, प्राची सती, दीक्षा सिंह, राजेंद्र सिंह बिष्ट, राजेंद्र सिंह बगडवाल, पूजा, महेंद्र प्रसाद, घनानंद भट्ट, प्रकाश कुमार, दीपक, विद्या, उषा बनकोटी, आनंद सिंह परिहार, नवीन चंद्र तिवारी, जगदीश सिंह, त्रिभुवन उपाध्याय, गौरव पांडेय, राहुल मनराल, बलवंत सिंह, रजनी नेगी, अरविंद प्रसाद, पवन कुमार, राजेंद्र सिंह बिष्ट, नरेंद्र सिंह बिष्ट, मुकेश कुमार, तुलसी आर्या, ममता बिष्ट, साधना, आइसा रावत, रिंकी नेगी, किरन तिवारी, पूनम आर्या, कीर्ति सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।
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