इंडिया भारत न्यूज डेस्क: देशभर के 12.40 लाख केमिस्टों और वितरकों का प्रतिनिधित्व करने वाले ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने केंद्रीय वित्त मंत्री और जीएसटी परिषद की अध्यक्ष निर्मला सीतारमण से सभी दवाओं को पांच प्रतिशत जीएसटी स्लैब के तहत लाने और महत्वपूर्ण जीवन रक्षक दवाओं को जीएसटी से मुक्त रखने का अनुरोध किया है।
उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष बीएस मनकोटी व महामंत्री अमित गर्ग ने मीडिया को जारी बयान में कहा, एआईओसीडी के अध्यक्ष जेएस शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जीएसटी प्रणाली को सरल बनाने की घोषणा का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि केमिस्ट अंतिम छोर के स्वास्थ्य सेवा प्रदाता हैं, जो 140 करोड़ नागरिकों से सीधे संपर्क में रहते हैं, तथा दवा के बिलों में किसी भी प्रकार की वृद्धि का सीधा असर मरीजों पर पड़ता है।
एआईओसीडी ने कहा है कि औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) के तहत विनियमित आवश्यक दवाओं को अतिरिक्त कर भार से मुक्त किया जाना चाहिए। डीपीसीओ 27 चिकित्सीय क्षेत्रों को कवर करते हुए आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करता है। आवश्यक दवाओं की वर्तमान सूची में 2817 फॉर्मूलेशन शामिल हैं।
एआईओसीडी ने अनुरोध किया कि सभी दवाओं, विटामिन, प्रोबायोटिक्स, पोषण संबंधी और खाद्य पूरकों के साथ-साथ शिशु आहार को भी 5 प्रतिशत जीएसटी दर के अंतर्गत रखा जाए। इसके अलावा, इसने कैंसर, गुर्दे की बीमारियों, हृदय संबंधी बीमारियों, पुरानी/दुर्लभ बीमारियों और रक्त से संबंधित दवाओं जैसी गंभीर बीमारियों से निपटने वाली दवाओं को जीरो प्रतिशत जीएसटी दर के अंतर्गत रखने का प्रस्ताव रखा।
इसके अतिरिक्त, 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब को समाप्त करने के साथ, यह महत्वपूर्ण है कि आयुर्वेदिक दवाओं को बढ़े हुए कराधान का सामना न करना पड़े और पहले इस स्लैब में आने वाली सभी दवाओं को जीरो प्रतिशत या 5 प्रतिशत जीएसटी में परिवर्तित कर दिया जाए।
जेएस शिंदे और राजीव सिंघल ने कहा कि दवाइयां विलासिता की वस्तुएं नहीं, बल्कि जीवन रेखाएं हैं। जीएसटी कम करने से लाखों मरीजों और उनके परिवारों, खासकर जिनके पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है, पर बोझ कम होगा।
एआईओसीडी के पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक में सरकार एक संवेदनशील और ऐतिहासिक निर्णय लेगी। इस कदम से लाखों मरीजों को सीधी राहत मिलेगी। मानवता को कठिनाई पर और करुणा को वाणिज्य पर वरीयता दी जाएगी।
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