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VPKAS हवालबाग में आयोजित हुआ 50 वां कृषि विज्ञान मेला, मुख्य अतिथि डॉ हरि शंकर गुप्त बोले- विकसित तकनीकियों को अंगीकृत करने से पहाड़ होगा खुशहाल

 

अल्मोड़ा। हवालबाग स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में बुधवार को “विकसित भारत हेतु उन्नत पर्वतीय कृषि” थीम पर 50वें कृषि विज्ञान मेला आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि कृषि आयोग, असम के अध्यक्ष एवं बोरलॉग इंस्टिट्यूड फॉर साउथ एशिया के पूर्व महानिदेशक डॉ हरि शंकर गुप्त ने फीता काटकर कृषि मेले का शुभारंभ किया।

शुभारंभ अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत, गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल, मेयर अजय वर्मा, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान मुक्तेश्वर के संयुक्त निदेशक डॉ. यशपाल मलिक, रमेश चन्द्रा आदि मौजूद रहे। इस दौरान प्रगतिशील किसानों को पुरस्कृत किया गया।

मुख्य अतिथि डॉ. हरि शंकर गुप्त ने कहा कि 60 के दशक में भारत में एक करोड़ टन गेहूं पैदा होता था जो आधी आबादी के लिए ही पूरा हो पाता था। लेकिन आज कृषि उन्‍नति इस राह पर है कि भारत खाद्यान्न, सब्जी, फल उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है, तथा यह दुनिया को चावल निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के युवा एवं मातृशक्ति विकसित तकनीकियों को अंगीकृत करें तो जहां एक ओर वे पहाड़ को खुशहाल एवं सम्पन्न बना सकते हैं और युवाओं के पलायन को भी रोकने में कारगर सिद्ध हो सकते है।

मेयर अजय वर्मा ने कहा वैज्ञानिक, कृषक एवं जनमानस यदि संस्थान द्वारा विकसित प्रजातियों एवं तकनीकियों का उपयोग कर कृषि करेंगे तो उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश कि कृषि प्रगति से भी आगे बढ़ने में सक्षम होगा।

निदेशक डा. लक्ष्मीकांत ने गिनाईं उपलब्धियां

निदेशक डा. लक्ष्मीकांत ने संस्थान द्वारा किये गए शोध कार्यो तथा विकसित तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने संस्थान की 100 वर्ष की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि यह संस्थान अभी तक 200 से अधिक उनन्‍नतशील प्रजातियों का विकास कर चुका है। विगत वर्ष संस्थान द्वारा 14 उन्‍नतशील प्रजातियों का विकास किया गया जिसमें मक्का की वी.एल. त्रिपोषी, वी.एल. पोषिका, वी.एल. शिखर, धान की वी.एल. बारीक धान एवं वी.एल. बोसी धान, मंडुवा की वी.एल. मंडुवा 402 व 409, मादिरा की वी.एल. मादिरा 254 एवं चुवा की वी.एल. चुवा 140 प्रमुख है।

इस वर्ष संस्थान द्वारा विकसित तीन तकनीकों का पेटेंट के लिए आवेदन किया गया है तथा विभिन्‍न निजी संस्थानों से विकसित 11 तकनीकियों हेतु समझौता किया गया है। संस्थान के कृषकों के प्रक्षेत्र में करवाये गये अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों में 23 से 52 प्रतिशत तक उपज वृद्धि प्राप्त की गयी है। संस्थान द्वारा जनजातीय उप-योजना के अन्तर्गत चार जिलों में लगभग 43 गाँवों तथा अनुसूचित जाति उपयोजना के अन्तर्गत 28 गांव (जिनमें से 8 गांव चीन की सीमा से लगे है) में तकनीकों का प्रसार किया गया है, जिससे कृषकों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

फसलों की नई प्रजातियों का किया लोकार्पण

अतिथियों द्वारा संस्थान की नई प्रजातियों नामतः मक्का की वी.एल. शिखर, वी.एल. पोषिका, मडुवा की वी.एल. मडुवा 402 का लोकार्पण किया गया। साथ ही संस्थान द्वारा विकसित तकनीकी “पिनहेड आरंभ को छोटा करने और खाद्य मशरूम की उपज बढ़ाने के लिए माइक्रोबियल उत्तेजक/वर्धक” का लोकार्पण भी किया गया।

इसके अलावा संस्थान के प्रकाशनों नामत: धान की मड़ाई हेतु वीएल पैडी थ्रैशर, पर्वतीय क्षेत्रों में ढिंगरी (ऑयस्टर) मशरूम की खेती, अजोला एक वैकल्पिक पशुचारा पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका सुधार हेतु बटन मशरूम (खुम्ब) एवं किसानों के लिए वरदान किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) योजना का विमोचन किया गया। अतिथियों द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के कृषकों हेतु “मोबाईल सीड प्रोसेसिंग वैन” एवं अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अन्तर्गत “वेजिटेबिल वैंडिग वैन” का भी लोकार्पण किया।

इस अवसर पर संस्थान में चल रही जनजातीय उप-योजना के अन्तर्गत फरकिया, परसारी, कैलाशपुर गाँव के कृषकों को किल्टा बास्केट एवं अनुसूचित जाति उपयोजना के अन्तर्गत ग्राम चौना के कृषकों को पावर वीडर का वितरण किया गया।

किसान मेले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनेक संस्थानों, कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों द्वारा प्रतिभाग किया गया एवं लगभग 25 प्रदर्शनियाँ लगायी गयी। इस अवसर पर विभिन्‍न संस्थानों एवं विभागों के वैज्ञानिक एवं अधिकारी के अलावा विभिन्‍न क्षेत्रों से आये लगभग 800 कृषक मौजूद रहे।

 

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