प्रशासन ने चर्चा में रहे आदेश में लिपिकीय त्रुटि होने की कही बात, डीएम ने संबंधित कर्मचारी का स्पष्टीकरण जारी किया
अल्मोड़ा। आपदा मद से भाजपा कार्यालय की सुरक्षा दीवार के लिए 5.96 लाख रूपये स्वीकृत करने के कांग्रेस के आरोप के बाद यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वही, जिला प्रशासन ने इस सूचना को भ्रामक व गलत बताते हुए आदेश में लिपिकीय त्रुटि होने की बात कही है। डीएम आलोक कुमार पांडेय ने संबंधित कर्मचारी का स्पष्टीकरण जारी किया है। डीएम ने कहा प्रकरण में जिस कर्मचारी की लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी विनीत पाल ने कहा कि 20 मार्च 2025 को जारी आदेश में लिपिकीय त्रुटिवश धार की तुनी से बियरशिवा स्कूल को जाने वाले मार्ग में घरों के पास सुरक्षा एवं प्रतिरोधक दीवार का प्राक्लन की जगह भारतीय जनता पार्टी कार्यालय की सुरक्षा दीवार का प्राक्लन अंकित हुआ था। जिसे तत्काल संशोधित किया गया और संशोधित आदेश विभागों को जारी किया गया था। जिसकी पुष्टि कार्यालय में धारित अभिलेखों से की जा सकती है।
डीडीएमओ ने कहा कि डीएम द्वारा पत्रावली का अवलोकन किया गया गया है। जिसमें भाजपा कार्यालय को किसी भी प्रकार की धनराशि आवंटित नहीं की गयी है। एक निजी स्कूल के कार्यक्रम में डीएम से स्थानीय लोगों द्वारा सुरक्षा दीवार बनाने की मांग उठाई गई थी। डीएम के निर्देश पर सिंचाई खण्ड से मिले प्रस्ताव के क्रम में गठित समिति द्वारा 5.96 लाख की धनराशि लोगों की मांग के अनुरूप उक्त कार्य के लिए नियमानुसार स्वीकृत की गयी थी। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा आपदा मानकों के विपरीत किसी भी विभाग को योजनाओं के पुनर्निर्माण के लिए धनराशि आवंटित नहीं की गई है।
डीएम आलोक कुमार पांडेय ने इस सम्बन्ध में समस्त कार्यदायी संस्थाओं के ईई को भविष्य में केवल जनहित के प्रस्तावों को ही जिला मूल्याकंन समिति के सामने रखने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर विभाग की छवि को धूमिल किए जाने के उद्देश्य से कुटरचित एवं भ्रामक सूचनाएं प्रकाशित करवाई जाती है तो सम्बन्धित्त व्यक्ति के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही अमल में लाई जायेगी।
उधर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज ने जारी बयान में कहा कि जिला प्रशासन ने लिपिकीय त्रुटिवश ऐसा होने की अपनी गलती स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को अब यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि जिस राजस्व उपनिरीक्षक व जेई ने भाजपा कार्यालय का निरीक्षण किया और एक राजनीतिक पार्टी के कार्यालय का इस्टीमेट तैयार किया, क्या ऐसे अधिकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन कार्रवाई करेगा।
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