मनमानी से नदी का पारिस्थितकीय तंत्र प्रभावित होने की आशंका
अल्मोड़ा। क्वारब बाईपास सड़क निर्माण में नियमों की अनदेखी कर मलबा कोसी नदी में फेंका जा रहा है। इस मनमानी से नदी का पारिस्थितकीय तंत्र भी प्रभावित होने की पूरी आशंका है। विभागीय फाइलों में मलबा निस्तारण को डंपिंग जोन और साइट से वहां मिट्टी, पत्थर फैंकने का खर्च भी निर्धारित है, लेकिन नियम धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।
नदियों में किसी भी तरह का मलबा नहीं डाले जाने का सख्त नियम बना हुआ है, लेकिन क्वारब में खुले आम इस नियम की धज्जियां उड़ रही हैं। मलबा निस्तारण को लेकर एनजीटी के भी स्पष्ट नियम हैं। सड़क निर्माण के दौरान निकलने वाले मलबे को डंपिंग जोन में ले जाकर निस्तारित करने का नियम है। कार्यदाई विभाग की फाइलों में नियमानुसार डंपिंग जोन भी बनता है और डंपिंग जोन तक मलबे को ले जाने के लिए खर्च भी तय होता है, लेकिन वास्तविकता इसके उलट है।
सड़क बनाते समय लगभग सभी स्थानों पर मलबे को पहाड़ ढलान में धकेल दिया जाता है। इससे उपजाऊ जमीन पट जाती है और कुछ समय बाद मलबा नदी क्षेत्र में पहुंचने के गंभीर दुष्परिणाम होते हैं। विशेषज्ञों ने राज्य में हाल में घटित आपदा से हुए व्यापक नुकसान का प्रमुख कारण बेतरतीब ठिकाने लगाए मलबे को ठहराया है। मलबे के उचित निस्तारण को लेकर विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों, सरकार और अधिकारियों के स्तर पर चिंता तो जताई जाती है, लेकिन इस चिंता का असर धरातल पर दिखाई नहीं देता।
भविष्य में आपदा की वजह बन सकता है मलबा
अल्मोड़ा। अधिकांश मामलो में सड़क निर्माण एजेंसियां पैसा बचाने के लिए मलबे को सीधे नदियों में धकेल देती है। इसे न केवल आपदा का खतरा बढ़ रहा है, बल्कि नदियों का पारिस्थितकीय तंत्र भी प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में भूस्खलन प्रभावित पहाड़ी के निकट क्वारब बाईपास बन रहा है। सड़क कटिंग में निकल रहे भारी मात्रा में मलबे के निस्तारण को बने नियमों के पालन की कोई चिंता नहीं है।
खड़ी पहाड़ी को काट कर बन रही सड़क का मलबा सीधे नदी में गिर रहा है। अन्य स्थानों पर भी मलबा पहाड़ी के ढलान पर ही डंप हो रहा है। अब सवाल उठता है नदी तट पर जमा मलबा तेज बारिश के दौरान जब नीचे की तरफ बहेगा तो क्या यह किसी आपदा का कारण नहीं बनेगा? जिस तरह नियमों की अनदेखी हो रही है उससे स्पष्ट है कि एनजीटी के नियम, विशेषज्ञों व पर्यावरणविदों के सुझावों से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है।
क्या बोले अधिकारी
अल्मोड़ा। अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड लोनिवि हर्षित गुप्ता ने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान निकलने वाले मलबे के निस्तारण को स्पष्ट नियम हैं। विभाग भी नियमों का पालन करता है। खड़ी पहाड़ी को काटकर बाईपास सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। तीखे ढलान में मलबे को रोक कर तत्काल डंपिंग जोन में निस्तारित करना संभव नहीं है। कच्ची सड़क और बेली ब्रिज बनते ही नदी की और फैला मलबा हटाया जाएगा। विभाग नियमों को लेकर सजग है और नियमों का पालन किया जाएगा।
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