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पंचतत्व में विलीन हुए लोकगायक दीवान कनवाल, बेतालेश्वर घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

 

अल्मोड़ा: उत्तराखंड के जाने-माने लोकगायक दीवान कनवाल पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास स्थान खत्याड़ी से बुधवार अपराह्न 3:30 बजे स्थानीय बेतालेश्वर घाट को निकली। जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके दो पुत्रों ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी।

 

प्रसिद्ध लोकगायक दीवान सिंह कनवाल का बुधवार सुबह निधन हो गया था। उनके निधन से उत्तराखंड के कला जगत में शोक की लहर है। बुधवार को बेतालेश्वर घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। जहां सैकड़ो लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

 

लोकगायक दीवान कनवाल की आवाज के लोग दिवाने थे। इसके साथ ही उनका ठेठ पहाड़ी अंदाज और उनके गीतों में पहाड़ों की बात लोगों के दिलों में घर कर जाती थी। लोग प्यार उन्हें को दीवान दा कहकर बुलाते थे। उनके हर एक गीत में पहाड़ का वर्णन होता था।

 

इस दौरान पूर्व विस उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, उपपा केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी, वरिष्ठ रंगकर्मी व पत्रकार नवीन बिष्ट, रवि रौतेला, ललित लटवाल, विनीत बिष्ट, डॉ. देव सिंह पोखरिया, लोक कलाकार महा संघ अध्यक्ष सुंदर लटवाल, गोकुल बिष्ट, हरीश बिष्ट, पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख आनंद कनवाल, देव सिंह, राजीव गुरुरानी, धर्मेंद्र बिष्ट, कमलेश कनवाल, राजेन्द्र खड़ायत, मनमोहन चौधरी, राहुल अधिकारी, हर्ष कनवाल, ललित पांडे, राजेंद्र कनवाल, मानव कनवाल, मदन सिंह, हरीश नेगी, जगत कनवाल, त्रिलोक लटवाल, भूपेंद्र बिष्ट, भूपेंद्र कनवाल, देव सिंह चौहान, मिकी टम्टा, शोबन कनवाल, प्रकाश भट्ट, राजेन्द्र सिराड़ी, राजेन्द्र नयाल, नारायण थापा, रमेश लाल, चन्द्रशेखर, पीयूष कुमार, नीरज कुमार, संजय कुमार, संदीप नयाल, महेंद्र महरा, विनीता बोरा, चंदन कुमार समेत भारी संख्या में उनके प्रशंसक मौजूद रहे।

 

खामोश हो गई पहाड़ की आवाज

दीवान कनवाल की आवाज में कुमाऊं की वादियों की मिठास, पहाड़ों की संवेदना और लोकजीवन की गहराई साफ झलकती थी। उन्होंने कई गीतों के माध्यम से कुमाऊंनी लोकसंगीत को नई पहचान दिलाई। 1987 में पहली कुमाउनी ‘मेघा आ’ में अपनी मधुर आवाज का लोहा मनवाया। 35 साल तक वह आकाशवाणी ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन में ए-ग्रेड गायक रहे। उन्होंने कुमाउनी लोक संगीत में 20 से अधिक एल्बम और करीब 100 से अधिक गीत गाए। वहीं, खत्याड़ी और हुक्का क्लब की रामलीला में उनके विभिन्न पात्रों के मंचन को लोग आज भी याद करते है।

 

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसिद्ध लोक कलाकार दीवान कनवाल के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दीवान कनवाल ने उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक संगीत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन उत्तराखण्ड की लोक कला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों एवं उनके प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।

 

कांग्रेस ने जताया शोक

लोकगायक दीवान कनवाल के निधन पर कांग्रेस पार्टी ने शोक जताया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी, पूर्व स्पीकर गोविन्द सिंह कुंजवाल, जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, तारा चंद्र जोशी, पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी, आनंद बगड़वाल, तारा चंद्र साह, आनंद बिष्ट, विनोद वैष्णव, नारायण दत्त पाण्डेय, दीप डांगी, निर्मल रावत, अमरजीत भाकुनी, दीवान सतवाल, देवेंद्र बिष्ट, वैभव पाण्डेय आदि ने शोक जताया है।

 

रामलीला कमेटी खत्याड़ी ने जताया शोक

अल्मोड़ा। प्रसिद्ध लोक कलाकार और रामलीला कमेटी खत्याड़ी के सदस्य दीवान कनवाल के निधन पर कमेटी ने शोक जताया और उनके निधन को अपूर्ण क्षति बताया है।शोक जताने वालों में अध्यक्ष हिमांशु कनवाल, देवेंद्र कनवाल, बसंत कनवाल, हर्ष कनवाल, पान सिंह कनवाल, पुष्कर कनवाल, नरेंद्र कनवाल, उमेद कनवाल, जीवन लटवाल, गोविंद कनवाल, रविन्द्र कनवाल, प्रियांशु कनवाल, रजत कनवाल, राहुल कनवाल, मनोज कनवाल, सुमित कनवाल, महेंद्र कनवाल आदि शामिल रहे।

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