इंडिया भारत न्यूज डेस्क(IBN): कहते हैं, नाम में क्या रखा है। लेकिन हर कोई इससे इत्तफाक नहीं रखता। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मुगलों व ब्रिटिश शासन के दौरान रखे गए कई शहरों व स्थानों के नाम बदल दिए। अब उत्तराखंड की धामी सरकार ने भी ब्रिटिशकालीन नामों को बदलने का निर्णय किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सूरजकुंड में चल रही गृह मंत्रियों की बैठक में भाग लेने जाने से पहले मीडिया से बातचीत में यह बात कही। मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में नाम बदलने का प्लान साझा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह प्रेरणा प्रधानमंत्री मोदी से मिली है। उन्होंने कहा कि गुलामी के प्रतीकों को हटाया जाएगा। ऐसे में राज्य में जो भी जगह ब्रिटिश काल और गुलामी के प्रतीक हैं या अंग्रेज अफसरों के नाम पर स्थानों के नाम हैं उन्हें बदला जाएगा।
माना जा है कि मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद अब संबंधित विभागों से इसकी सूची मांगी जाएगी और फिर नाम बदलने की प्रकिया शुरू होगी।
राज्य में लैंसडौन, मसूरी, देहरादून, नैनीताल, रानीखेत समेत विभिन्न शहरों व क्षेत्रों के साथ ही छावनी परिषदों के अंतर्गत सड़कों, स्थानों के नाम ब्रिटिशकालीन हैं, जिनमें अभी तक कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि इनके पुराने अथवा नए नामकरण की बात समय-समय पर उठती रही है। हाल में ही छावनी परिषद लैंसडौन ने लैंसडौन का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया है। अंग्रेजी शासनकाल के दौरान लार्ड लैंसडौन भारत में अंग्रेज वायसराय थे और उन्हीं के नाम पर ‘कालौं का डांडा’ (काले बादलों से घिरा पहाड़) नाम लैंसडौन रखा गया था।
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