इंडिया भारत न्यूज़ डेस्क: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन(UGC) ने बड़ा फैसला लिया है। असिस्टेंट प्रोफेसरों भर्ती के लिए पीएचडी की डिग्री अनिवार्यता खत्म कर दी गई। यानी कि अब पीएचडी की डिग्री ऑप्शनल होगी। यूजीसी ने अपना फैसला पलट दिया है।
यूजीसी के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार के मुताबिक, असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति के लिए पीएचडी योग्यता वैकल्पिक बनी रहेगी। राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET), राज्य पात्रता परीक्षा (SET) और राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (SLET) पद पर सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम मानदंड होंगे।
अधिसूचना जारी
यूजीसी ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी की है। अधिसूचना के जरिए सहायक प्रोफेसर पद पर भर्ती के नियमों में बदलाव किया गया है। इसके मुताबिक उच्च शिक्षा संस्थानों में सहायक प्रोफेसर यानी सहायक प्राध्यापकों की सीधी भर्ती में नेट, एसईटी, एसएलईटी को न्यूनतम योग्यता मानंदड बनाते हुए अनिवार्य कर दिया है। इस विनियमन को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (विश्वविद्यालयों एवं कालेजों में शिक्षकों एवं अन्य अकादमिक कर्मियों की नियुक्ति तथा उच्च शिक्षा में मानदंड बनाए रखने के अन्य कदमों के लिए न्यूनतम पात्रता) दूसरा संशोधन विनियमन 2023 कहा जाएगा
2018 में तय किए थे नियुक्ति के मानदंड
वर्ष 2018 में यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश स्तर के पदों पर नियुक्ति के मानदंड तय किए थे, जिसमें पीएचडी को सहायक प्रोफेसर के लिए अनिवार्य किया गया था। तब छात्रों को पीएचडी पूरा करने के लिए तीन वर्ष का समय दिया था और सभी विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2021-22 से भर्ती की प्रक्रिया के तहत आवेदन शुरू करने को कहा था। कोरोना महामारी के चलते 2021 में विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसरों के रूप में भर्ती के लिए पीएचडी को न्यूनतम अर्हता के रूप में लागू करने की तिथि को जुलाई 2021 से बढ़ाकर जुलाई 2023 कर दिया था लेकिन अब नियमों में बदलाव किया गया है।
असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए PhD अनिवार्य नहीं
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी 2021 में कहा था कि विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए पीएचडी डिग्री अनिवार्य करना वर्तमान शिक्षा प्रणाली में अनुकूल नहीं है। हमारा मानना है कि असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए पीएचडी की आवश्यकता नहीं है। अगर अच्छी प्रतिभा को शिक्षण के लिए आकर्षित करना है, तो यह शर्त नहीं रखी जा सकती है। हां, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के स्तर पर इसकी आवश्यकता होती है। लेकिन, एक असिस्टेंट के लिए पीएचडी प्रोफेसर शायद हमारे सिस्टम के अनुकूल नहीं हैं और इसीलिए हमने इसे सुधार लिया है।
कुछ साल पूर्व यूजीसी ने सहायक प्रोफेसर के लिए पीएचडी को अनिवार्य बना दिया था। लेकिन इस बदलाव के बाद भी इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। नियुक्ति प्रक्रिया में जब एकेडमिक स्कोर तैयार होता है तो पीएचडी उम्मीदवार को ज्यादा अंक दिए जाते हैं और गैर पीएचडी को कम। ऐसे में पीएचडी उम्मीदवार की मौजूदगी में गैर पीएचडी धारक की नियुक्ति मुश्किल होती है। जहां पीएचडी उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं, वहां जरूर इसका फायदा होगा।
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