अल्मोड़ा: पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा घोषित उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी का कहीं अता पता नहीं है। सिर्फ सड़कों पर लगे बोर्डों में ग्रीष्मकालीन राजधानी का नाम दिखाई दे रहा है। धरातल पर राजधानी को लेकर कोई काम नहीं हुआ है। आलम यह है कि भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में सरकार तो दूर की बात एसडीएम व तहसीलदार तक नहीं बैठते हैं। भाजपा सरकार ने स्थाई राजधानी गैरसैंण की भावना रखने वाले लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन राजधानी भाजपा का सबसे बड़ा झूठ है। और कांग्रेस इसको लेकर अभियान चलाएगी।
पूर्व सीएम हरीश रावत शुक्रवार को यहां नगर स्थित एक होटल में पत्रकारों से मुखातिब हुए। जहां उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की पक्षधर रही है। कांग्रेस की पूर्व सरकारों में विधानसभा भवन बनाकर इस ओर कार्य शुरू किया गया। लेकिन भाजपा सरकार में गैरसैंण विधानसभा भवन में एक ईंट तक नहीं लगाई गई है। सिर्फ कागजों में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया गया।
पूर्व सीएम रावत ने कहा कि कांग्रेस ने गैरसैंण को लेकर जो भी कदम उठाए, कभी भी चुनाव को देखते हुए नहीं उठाए। वे अपने पहले के वायदे पर कायम है। कांग्रेस 2027 में सत्ता में आएगी तो गैरसैंण को स्थाई राजधानी का दर्जा दिया जाएगा। कांग्रेस का सीएम इस दिशा में कदम उठाएगा।
पूर्व सीएम रावत ने कहा कि उत्तराखंडियत हमारी पहचान है। और भाजपा सरकार योजनाबद्ध तरीके से उत्तराखंडियत को कमजोर कर रही है। राज्य में आज शिक्षा, स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं पूर्ण रूप से पटरी से उतर चुकी है। कांग्रेस ने राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय के साथ ही मॉडल विद्यालय बनाए। लेकिन भाजपा ने स्कूलों का नाम बदलने के सिवाए कुछ नहीं किया।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज, निवर्तमान नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, नगर अध्यक्ष तारा चंद्र जोशी, पूर्व जिलाध्यक्ष पीतांबर पांडे, पूर्व पालिकाध्यक्ष शोभा जोशी, मनोज सनवाल, अंबी राम, प्रताप सिंह सत्याल, त्रिलोचन जोशी, निर्मल रावत आदि मौजूद रहे।
निकाय चुनाव में देरी का कांग्रेस करेगी विरोध
पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा प्रदेश सरकार ने जानबूझकर राजनीतिक वजहों से निकाय चुनाव में देरी की है। मंगलौर व बद्रीनाथ के उपचुनाव में हारने के बाद भाजपा बुरी तरह डरी हुई है। उन्होंने कहा कि अगर निकाय चुनाव में और देरी की तो कांग्रेस विरोध स्वरूप सड़कों पर उतरेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह स्पष्ट करे कि संविधान संशोधन के जरिए नगर निकाय व पंचायतों को जो अधिकार मिले हैं वह अधिकार उन्हें दिए जाए।
केंद्र सरकार व एससी से पुनर्विचार करने का अनुरोध
आरक्षण को लेकर जारी कोर्ट की गाइडलाइन पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि जो लोग सड़कों पर उतरकर इसका विरोध कर रहे है, उन्हें आशंका है कि भविष्य में आरक्षण को खत्म किया जा सकता है। आज भी सरकारी विभागों में आरक्षित कई पद रिक्त पड़ें हैं। आरक्षण लागू होने के बाद भी इतने वर्षो तक इन्हें नहीं भरा जा सका। पूर्व सीएम रावत ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते है लेकिन जो लोग विरोध कर रहे है उनकी भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट व केंद्र सरकार से आरक्षण के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
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