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आशिका ने पति आशीष संग रोपा परिणय पौधा, मैती आंदोलन को फिर से किया जीवित

अल्मोड़ा। दुल्हन आशिका ने बाबुल के घर से विदा होने के समय मायके वालों को अनूठा उपहार दिया। आशिका ने दूल्हे आशीष के साथ परिणय पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। रोपे गए पौधे का आजीवन रक्षा करने का संकल्प लिया।

जिले के लमगड़ा विकासखंड के रणाऊं निवासी आईटीबीपी के सेवानिवृत इंस्पेक्टर (फार्मासिस्ट) शेर सिंह बगड़वाल और राधा बगड़वाल के पुत्र आशीष सिंह बगड़वाल आशू का विवाह तिमिलाबगड़, कपकोट बागेश्वर निवासी हीरा सिंह मर्तोलिया और रामी देवी की पुत्री आशिका के साथ संपन्न हुआ। विदाई के वक्त दुल्हन आशिका ने पति आशीष के साथ घर के समीप परिणय पौधा रोपा। दुल्हन ने पति के संग पौधे का जीवन भर देखरेख करने का संकल्प लिया। दुल्हन ने बीएससी नर्सिंग की है जबकि दुल्हा आशीष आईटीबीपी में असिस्टेंट सब इंसपेक्टर फार्मासिस्ट पद पर कार्यरत हैं।

दोनों का कहना है कि वातावरण में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौंधे लगाए जाने चाहिए। दोनों ने मैती आंदोलन को फिर से जीवित किया। वहां मौजूद सेवानिवृत प्रभारी अधिकारी फार्मेसी मोहन सिंह बगड़वाल, लमगड़ा के पूर्व ब्लाक प्रमुख विक्रम सिंह बगड़वाल, पूर्व जिपं सदस्य विक्रम सिंह भंडारी, पूर्व प्रधानाचार्य पारस नाथ सिंह ने दुल्हा और दुल्हन के प्रयासों की सराहना की।

क्या है मैती आंदोलन

मैती आंदोलन उत्तराखंड राज्य में चला एक प्रमुख पर्यावरण संबंधी आंदोलन है। मैती शब्द का अर्थ होता है मायका, यानि कि जहां लड़की जन्म से लेकर शादी होने तक अपने माता, पिता के साथ रहती है। जब उसकी शादी होती है तो वह ससुराल, मायका (मां-बाप) का घर में गुजारी यादों के साथ-साथ विदाई के समय रोपित पौधे की मधुर स्मृति भी ले जाती है। इसलिए शादी के समय दूल्हा-दुल्हन द्वारा फलदार पौधों का रोपण किया जाता है।

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