अल्मोड़ा। पिछले फायर सीजन में जिले में अलग अलग वनाग्नि की घटनाओं में वनकर्मियों समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए प्रशासन व वन विभाग ने वनाग्नि की रोकथाम के प्रयास कर रहा है। लेकिन कुछ अधिकारी डीएम के दिए निर्देशों का पालन करना भी उचित नहीं समझ रहे है।
डीएम आलोक कुमार पांडेय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट वीसी कक्ष में वनाग्नि रोकथाम को लेकर बैठक आयोजित की गई। डीएम ने जल निगम तथा जल संस्थान के अधिकारियों को संवेदनशील वन क्षेत्र जहां पानी की पाइप लाइन बिछी हुई हैं वहां प्रत्येक 500 मीटर पर पानी का प्वाइंट बनाया जाने के निर्देश दिए, जिससे फॉरेस्ट फायर के दौरान उसका उपयोग करके आग पर काबू पाया जा सके।
डीएम ने पूर्व में भी बैठक कर इस पहल को लेकर संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए थे। डीएम ने उनकी समीक्षा की। अधिकारियों द्वारा इस पहल को धरातल पर उतारने के लिए अपेक्षित कार्य नहीं किए जाने पर डीएम ने गहरी नाराजगी जाहिर की तथा दो दिन के भीतर सर्वेक्षण पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए।
डीएम ने सख्त लहजे में कहा कि यह काम प्राथमिकता से किया जाना है। चूंकि शासन ने वनाग्नि को आपदा घोषित कर दिया गया है, आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं होगी। डीएम ने जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को सभी खंडों को दो दो लाख रुपए आंशिक धनराशि के रूप में देने के निर्देश दिए है, जिससे वें अपने कार्यों को सुचारू रूप से कर सकें।
बैठक में डीएफओ दीपक सिंह, सीडीओ दिवेश शाशनी, डिप्टी कलेक्टर याक्षी अरोड़ा समेत संबंधित कार्यदाई संस्थाओं के ईई मौजूद रहे।
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