अल्मोड़ा। पहाड़ की लाइफ लाईन अल्मोड़ा-हल्द्वानी नेशनल हाईवे 109 को रविवार यानि 29 जून से भारी मालवाहक वाहनों के लिए बंद रहेगा। क्वारब डेंजर जोन के पास हो रहे लैंडस्लाइड व सड़क क्षतिग्रस्त होने से दुर्घटना होने की आशंका को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने अग्रिम आदेश तक मालवाहकों के लिए इस मार्ग को प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही एनएच के लिए ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया है।
पुलिस के नये प्लान के तहत बागेश्वर, कौसानी, सोमेश्वर से हल्द्वानी को जाने वाले भारी माल वाहक वाहन कोसी से मजखाली वाया रानीखेत होते हुए हल्द्वानी और पिथौरागढ़, धौलछीना, दन्या से हल्द्वानी को जाने वाले भारी माल वाहक वाहन बाड़ेछीना, दन्या, सुवाखान, लमगड़ा वाया शहरफाटक होते हुए हल्द्वानी को जायेंगे। वही, अल्मोड़ा से हल्द्वानी को जाने वाले भारी माल वाहक वाहन करबला तिराहा, पाण्डेखोला, कोसी वाया रानीखेत होते हुए या फिर सिकुड़ा बैंड, लमगड़ा वाया शहरफाटक होते हुए हल्द्वानी को जायेंगे।
एसएसपी ने क्वारब का किया निरीक्षण
अल्मोड़ा। एसएसपी देवेन्द्र पींचा ने शनिवार को क्वारब डेंजर जोन का औचक निरीक्षण किया। एसएसपी ने क्वारब के स्थिति का जायजा लेकर यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए बैरिकेडिंग लगाने व छोटे-बड़े वाहनों को सुरक्षित तरीके के बारी-बारी छोड़ने के निर्देश दिए। एसएसपी ने पुलिसकर्मियों को निर्देशित करते हुए कहा कि भारी व किसी भी प्रकार के वाहनों को पुल पर खड़े न होने दें। इस मौके पर सीओ गोपाल दत्त जोशी, कोतवाल योगेश चन्द्र उपाध्याय सहित एनएच के अधिकारी मौजूद रहे।
लोगों ने प्रशासन व जनप्रतिनिधियों पर उठाएं सवाल
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा–हल्द्वानी एनएच में क्वारब के पास पिछले एक साल से समस्या बनी हुई है। एक बार फिर भारी माल वाहकों के आवागमन पर प्रतिबंध लगने से राशन, सब्जी समेत अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने तय है। लोगों ने इसके लिए प्रशासन, सरकार और जन प्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया है। लोगों का कहना है क्वारब के काफी सुस्त गति से काम चल रहा है हाईवे को दुरस्त होने में अभी लंबा वक्त लग सकता है। मानसून सीजन नजदीक है ऐसे में सरकार व प्रशासन को चाहिए था कि वह बरसात से पहले पहाड़ी व नदी की ओर से ट्रीटमेंट कर सड़क को मजबूत स्थिति में पहुंचाते ताकि बरसात में निर्बाध रूप से एनएच में वाहन चलते। मालवाहकों के वैकल्पिक से आने के बाद महंगाई बढ़ेगी। लेकिन इन समस्याओं पर जिम्मेदारों ने खामोशी की चादर ओढ़ ली हैं।
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