युवा पीढ़ी को मेहनत और खेती-बाड़ी कर कर्तव्य परायण होने की आवश्यकता: टम्टा
अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालबाग में शुक्रवार को 51 वां कृषि विज्ञान मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने मेले का शुभारंभ किया। मेले में अनेक संस्थानों, कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों के साथ ही छह सौ से अधिक कृषकों ने प्रतिभाग किया। करीब तीस प्रदर्शनियां लगायी गई।
अतिथियों द्वारा संस्थान की सब्जी मटर प्रजाति वी.एल. माधुरी का लोकार्पण किया गया। साथ ही संस्थान द्वारा प्रकाशित दो प्रसार प्रपत्रों का विमोचन किया गया। मेले में प्रगतिशील कृषक बागेश्वर के लोब गांव निवासी दीपा देवी, सोमेश्वर के लोद गांव निवासी मदन मोहन गिरी एवं दुगालखोला निवासी भूपेन्द्र सिंह सतवाल को पुरुस्कृत किया गया।
मुख्य अतिथि टम्टा ने संस्थान की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान मनुष्य की आवश्यकता के अनुरूप अत्याधुनिक तकनीकें, नकदी फसलों, मक्का, मंडुआ इत्यादि पर्वतीय फसलों की उन्नतशील प्रजातियों का विकास करने में सतत प्रयासरत है। कहा कि आज का युवा बंजर भूमि को उपजाउ भूमि में बदलकर रोजगार के अवसर ढूंढेगा तो उसे योग और आसन करने की आवश्यकता नहीं पडे़गी। उसे हमारी दो पीढ़ी वाले लोगों की तरह स्वयं मेहनत और खेती बाड़ी कर कर्तव्य परायण होने की आवश्यकता है तभी हम विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम होंगे।
संस्थान के निदेशक डॉ लक्ष्मी कांत ने कहा संस्थान अब तक 204 उन्नतशील प्रजाति के बीज विकसित किए हैं। जो देश की कृषि पैदावार की बढ़ोतरी में संतोष जनक योगदान दे रहा है। उन्होंने बताया संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित शंकर मक्का की वीएल त्रिपोषी, वीएल मधुरिमा और वीएल पोषिका प्रोटीन, जिंक, विटामिन ए और लो फेटिक एसिड प्रदान करती हैं।
पर्यावरण संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ आईडी भट्ट ने परंपरागत कृषि में वैज्ञानिक तकनीक अपनाने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए खेती के साथ मेडिसिनल प्लांट लगाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मेयर अजय वर्मा, सीएचओ डॉ नरेंद्र कुमार, पूर्व निदेशक डॉ जेसी भट्ट, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ निर्मल हडाऊ ने भी विचार रखे।
मेले के दौरान कृषकों ने बागवानी व कृषि से संबंधित कई समस्याएं रखी जिनका संस्थान के वैज्ञानिकों ने समाधान बताया और कृषकों को वैज्ञानिक तरीकें से खेती के उपाय बताए। संचालन डॉ. कामिनी बिष्ट, डॉ. अनुराधा भारतीय व निधि सिंह ने संयुक्त रूप से किया। धन्यवाद प्रस्ताव प्रभागाध्यक्ष, फसल सुधार डा. निर्मल कुमार हेडाऊ ने किया। यहां मुख्य तकनीकी अधिकारी रेनू सनवाल समेत संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी समेत सैकड़ों कृषक मौजूद रहे।
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