-पर्याप्त बजट के बावजूद पहाड़ी का ट्रीटमेंट शुरू नहीं होने पर उठ रहे सवाल
-सरकार, जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के दावे फेल
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग में क्वारब की भूस्खलन पहाड़ी सुगम यातायात के लिए बीरबल की खिचड़ी साबित हो रही है। सड़क सुधार के लिए पर्याप्त बजट भी है और विशेषज्ञ विभागों ने इस संबंध में सुझाव भी दिए हैं, लेकिन सरकारी फाइलों और आफिस के फेर में पहाड़ी का ट्रीटमेंट शुरू ही नहीं हुआ। इस देरी का नुकसान यह है कि नदी की तरफ से सड़क सुरक्षा दीवार निर्माण का काम भी ठप पड़ा है।
करीब डेढ़ साल पहले से क्वारब के पास पहाड़ी का करीब दो सौ मीटर से अधिक हिस्सा नदी की तरफ धंसने लगा था। मिट्टी मलबा और पत्थरों के सड़क पर जमा हो जाने से यातायात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। सड़क की सुरक्षा दीवार दरक जाने से संकरे मार्ग पर यातायात खतरनाक बना था। लंबे समय तक मार्ग में यातायात भी बाधित रहा।
सरकार ने पहाड़ी के ट्रीटमेंट के लिए 51 करोड़ और नदी की सुधार कार्य को करीब 17 करोड़ का बजट भी एनएच रानीखेत खंड को छह माह पहले जारी कर दिया था। टेंडर के बाद नदी की तरफ से दीवार निर्माण का काम शुरू भी हो गया था। सितंबर महीने में चार दिन तक हुई लगातार बारिश से पहाड़ी से गिरे मलबे के दबाव से कंक्रीट स्टील मिक्स दीवार के कई ब्लॉकों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई थीं। इसके बाद दीवार निर्माण का काम भी ठप पड़ा है।
टीएचडीसी के विशेषज्ञों ने पहाड़ी के ट्रीटमेंट को लेकर एनएच को सुझाव दिए थे। विभाग ने इस काम की निविदा भी कर जल्द काम शुरू करने का दावा भी किया था, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीतने पर भी सुधारीकरण का काम शुरू नहीं हुआ है।
वैकल्पिक मार्ग भी जल्द बनने की उम्मीद नहीं
अल्मोड़ा। इंजीनियरों के मुताबिक यातायात पूरी तरह बंद किए बगैर भू-धंसाव की दृष्टि से संवेदनशील क्वारब पहाड़ी का ट्रीटमेंट कार्य होना सम्भव नहीं था। प्रशासन की प्रभावी पहल पर नदी के दूसरी तरफ से करीब तीन किमी का वैकल्पिक मार्ग तैयार करने का प्रस्ताव तैयार किया गया। करीब दस करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण कार्य चल रहा है।
इस धनराशि से मार्ग की कटिंग, दीवार कल्वर्ट निर्माण के अलावा दो वैली ब्रिज भी तैयार किया जा रहे हैं। वर्तमान रफ्तार से काम चला तो सड़क पूरी तरह चालू होने में कम से कम छह महीने से अधिक समय लगेगा। ऐसे में यदि जाड़े की बारिश और बर्फबारी से पहले क्वारब के क्षतिग्रस्त हिस्से में प्रभावी सुधार नहीं किया तो आवागमन बाधित होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
पहाड़ी के ट्रीटमेंट को विशेषज्ञों की रिपोर्ट काफी पहले ही मिल चुकी है। ट्रीटमेंट डिजाइन पर काम को लेकर संबंधित निर्माणदाई कंपनी से फूल प्रूफ योजना मांगी गई है। विभाग इस योजना का परीक्षण करेगा। इसके बाद ही ट्रीटमेंट का काम शुरू होगा। यह बात ठीक है कि पहाड़ी के ट्रीटमेंट काम में हो रही देरी से नदी की तरफ सुरक्षा दीवार निर्माण का काम भी प्रभावित हो रहा है। इसकी मुख्य वजह पहाड़ी में लूज हजारों टन मलबा हटाए बगैर न तो दीवार निर्माण का अवशेष काम शुरू करना संभव है और न ही क्षतिग्रस्त कंक्रीट ब्लॉक्स की मरम्मत की जा सकती है। प्रभावित क्षेत्र में मलबा हटाने के लिए मशीनें तैनात की हैं, ताकि यातायात बाधित नहीं हो।
-अशोक कुमार चौधरी, ईई, एनएच रानीखेत खंड।
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