देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया के जरिये विवाद शांत करने की पहल की है। रावत ने अपील करते हुए कहा कि उनके अर्जित अवकाश को लेकर किसी तरह का पक्ष-विपक्ष नहीं बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्हें भविष्य में मेरी हड्डियों की भी जरूरत होगी मैं महर्षि दधीचि की तरह समर्पण को तैयार हूं।
रावत ने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी नेतृत्व के फैसलों को स्वीकार किया है और आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने अपने लंबे सियासी सफर का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ाव बनाए रखने के लिए यह अवकाश जरूरी है। बकौल रावत, पूर्व विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल से मेरा लंबा मानसिक, भावनात्मक रिश्ता रहा है। उनके शब्द स्वाभाविक हैं। कुछ लोग तो होंगे, जिन्होंने मुझे भातृवत या पितृवत माना होगा। उनकी भी भावनाएं हो सकती हैं। फिर भी माफी चाहूंगा। मुझे 59 वर्षों की अथक यात्रा के दौरान हमेशा स्मरण रहा कि मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं। अंतिम रूप से पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व का निर्णय ही शिरोधार्य माना है। इतना लंबा व्रत अब संकल्प का रूप ले चुका है, वह अब न टूटेगा और न बदलेगा।
रावत ने कहा कि जिन नौजवानों को वर्ष 2027 में अपने लिए संभावनाएं दिखाई दे रही हैं, उन्हें यदि मेरी हड्डियों की जरूरत होगी, महर्षि दधीचि की तरह समर्पण को तैयार हूं। लंबे अंतराल के दौरान मेरा कई लोगों, समूहों, क्षेत्रों, जन अपेक्षाओं से जुड़ाव रहा है। जीवन के इस मोड़ में मुझे उनके परामर्श की भी आवश्यकता है। उनसे अपने जुड़ाव को दोहराने के लिए उनके मध्य जाने की जरूरत को भी मैं महसूस करता हूं। रावत ने आगे कहा कि मुझको लेकर उत्सुकता रखने वाले समीक्षकों का मैं आभारी हूं।
बेटी अनुपमा बोलीं- हर फैसले में पिता के साथ
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की बेटी और हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत ने भी सोशल मीडिया के जरिए उनका समर्थन किया। उन्होंने भावनात्मक पोस्ट में लिखा कि उनके पिता योद्धा हैं। कांग्रेस के लिए उन्होंने अपना सब-कुछ समर्पित किया है।
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