अल्मोड़ा: उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने प्रदेश में पत्रकारों, मीडिया कर्मियों एवं सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के विरुद्ध पुलिस द्वारा की जा रही दमनात्मक कार्रवाइयों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पार्टी ने कहा कि प्रदेश में सत्ता और प्रभावशाली तत्वों के खिलाफ आवाज उठाने वाले तथा उनकी खबरें प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
उपपा के केंद्रीय पी.सी. तिवारी, जो अखिल भारतीय श्रमजीवी पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय सचिव भी रहे हैं, ने बाजपुर (जनपद ऊधम सिंह नगर) के पत्रकार विमल भारती उर्फ गोल्डी के साथ बीते साल 13 नवंबर को हुई पुलिस कार्रवाई को अत्यंत गंभीर बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार के साथ मारपीट, गैरकानूनी ढंग से मकान तोड़ने, मनमानी गिरफ्तारी और अमानवीय व्यवहार की घटना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों में सत्यता है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल निष्पक्ष जांच कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
तिवारी ने कहा कि इस प्रकरण में उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों की भी अनदेखी की जा रही है। न्यायालय ने तीन सप्ताह में जांच कर कार्रवाई का अवसर दिया था, लेकिन राज्य प्रशासन द्वारा अपेक्षित कदम न उठाया जाना चिंताजनक है।
तिवारी ने यह भी कहा कि ऊधम सिंह नगर सहित प्रदेश में पत्रकारों के प्रति असुरक्षा और आक्रोश का वातावरण बन रहा है। हाल के दिनों में वरिष्ठ पत्रकारों के खिलाफ भी दबाव और धमकियों की घटनाएँ सामने आई हैं। पीड़ित पत्रकारों द्वारा राष्ट्रपति, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होना गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने मांग की है कि संबंधित मामलों की निष्पक्ष व समयबद्ध जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाए। पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में, पुलिस महानिदेशक, सूचना विभाग एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए।जिला स्तर पर पूर्व में गठित पत्रकार-सुरक्षा समितियों को पुनः सक्रिय किया जाए और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
उपपा अध्यक्ष तिवारी ने कहा कि यदि पत्रकारों का उत्पीड़न नहीं रुका और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पत्रकार संगठनों और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली शक्तियों को संयुक्त रूप से आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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