नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (ICIMOD) के लिए भारत की राष्ट्रीय समन्वय समिति (NCCII) की तीसरी बैठक तथा देश-स्तरीय परामर्श का आयोजन भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली में किया गया। बैठक की अध्यक्षता सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तनमय कुमार ने की।
बैठक का उद्देश्य देश-स्तरीय परामर्श के माध्यम से ICIMOD की छठी मध्यम अवधि कार्ययोजना (MTAP-VI: 2027–2030) के प्राथमिक कार्य क्षेत्रों का सह-डिज़ाइन करना था। बैठक के प्रारंभ में जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान कोसी कटारमल के निदेशक डॉ. आई.डी. भट्ट ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और भारत में ICIMOD की गतिविधियों को दिशा देने में NCC की भूमिका तथा हिमालय क्षेत्र में क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर अनुसंधान एवं विकास (R&D) के कार्यान्वयन हेतु GBPNIHE और ICIMOD के बीच साझेदारी पर प्रकाश डाला।
उन्होंने जानकारी दी कि ICIMOD की वर्तमान पाँचवीं मध्यम अवधि कार्ययोजना (MTAP-V: 2023–2026) दिसंबर 2026 में पूर्ण होगी और वर्ष 2027 से MTAP-VI के अंतर्गत एक नया चार-वर्षीय चक्र प्रारंभ होगा।
ICIMOD के महानिदेशक डॉ. पेमा ग्यामत्सो ने संगठन के अधिदेश (mandate) और विभिन्न रणनीतिक समूहों के अंतर्गत उसकी गतिविधियों की प्रस्तुति दी। उन्होंने ICIMOD की पाँचवीं मध्यम अवधि कार्ययोजना (MTAP-V: 2023–2026) की समीक्षा प्रस्तुत की तथा इसके अंतर्गत संचालित प्रमुख गतिविधियों जैसे वायु गुणवत्ता निगरानी, हिममंडल (क्रायोस्फियर) एवं जल संसाधन, सतत अर्थव्यवस्थाएँ, चारागाह एवं आर्द्रभूमि प्रबंधन, मानव–वन्यजीव संघर्ष आदि पर प्रकाश डाला।
क्षेत्रीय साझेदारी स्कोपिंग एवं नई साझेदारियों के माध्यम से क्षेत्रीय सदस्य देशों में हितधारकों की क्षमता-वृद्धि पर चर्चा की गई। साथ ही, हिंदूकुश–हिमालय (HKH) क्षेत्र में क्षेत्रीय शैक्षणिक नेटवर्क, जलवायु शासन और नीति संवाद को सुदृढ़ करने हेतु किए गए प्रयासों एवं पहलों को प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने MTAP-VI (2027–2030) के लिए प्रस्तावित उभरती चुनौतियों को भी प्रस्तुत किया, जिनमें पर्माफ्रॉस्ट, हिमनदी झीलों और GLOF की निगरानी, प्राकृतिक आपदाएँ, पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ, वायु प्रदूषण, बाह्य प्रवासन, बदलते परिदृश्य, जैव विविधता के बदलते हॉटस्पॉट, झरने, सूखा निगरानी, बाढ़ प्रबंधन, बदलते वित्तीय परिदृश्य, जलवायु एवं पर्यावरण पर क्षेत्रीय सूचना प्रणाली, क्षमता सुदृढ़ीकरण तथा क्षेत्रीय सहयोग का निर्माण शामिल है।
डॉ. पेमा ने आगे बताया कि MTAP-VI, बोर्ड द्वारा स्वीकृत ICIMOD रणनीति 2030 मूविंग माउंटेन्स के अनुरूप होगी तथा MTAP-V की उपलब्धियों पर आधारित रहते हुए क्षेत्रीय सदस्य देशों (RMCs) की नई एवं विकसित होती प्राथमिकताओं तथा बदलते राजनीतिक एवं वित्तीय परिदृश्य का उत्तर देगी।
सचिव तन्मय कुमार ने कहा कि MTAP-VI का केंद्रीय उद्देश्य देश और क्षेत्रीय सहभागिता को सुदृढ़ करना तथा भारतीय हिमालयी क्षेत्र की प्राथमिक समस्याओं पर अधिक प्रभावी परिणाम देना होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि MTAP-V के परिणामों और प्रस्तावित कार्य क्षेत्रों को सभी हिमालयी राज्यों के साथ साझा किया जाना चाहिए और प्रमुख हितधारकों के साथ चर्चा कर क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को MTAP-VI के प्रस्तावित कार्य क्षेत्रों में सम्मिलित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी बल दिया कि एक अंतर-सरकारी क्षेत्रीय संगठन के रूप में ICIMOD को सीमा-पार हिमालयी मुद्दों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और प्रतिबद्धताओं के अनुरूप क्षेत्रीय साझेदारी दृष्टिकोण पर आधारित हो। यह भी रेखांकित किया गया कि ICIMOD की गतिविधियाँ भारत में नोडल मंत्रालयों और संस्थानों के माध्यम से समन्वित होनी चाहिए, और इसके लिए अल्मोड़ा स्थित गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (GBPNIHE) में स्थित सेल को भारत में साझेदारों के बीच क्षेत्रीय नेटवर्क दृष्टिकोण के माध्यम से सुदृढ़ किया जाना चाहिए, जो क्षेत्रीय अनुसंधान गतिविधियों से उत्पन्न सभी रिपोर्टों और आंकड़ों की निगरानी करेगा।
संयुक्त सचिव नमिता प्रसाद, ने उल्लेख किया कि ICIMOD की प्रस्तावित MTAP-VI, नवंबर 2025 में GBPNIHE द्वारा आयोजित “हिमालयन कॉन्क्लेव” से उभरकर आई प्रमुख सिफारिशों पर आधारित हो सकती है, जिसमें हिमालय क्षेत्र में कार्यरत 70 से अधिक संगठनों ने भाग लिया था।
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) के संयुक्त सचिव ने कहा कि नोडल मंत्रालय और नोडल संस्थान को भारतीय हिमालयी क्षेत्र की प्राथमिकताओं की पहचान करनी चाहिए तथा ICIMOD को इन प्राथमिकताओं के अनुरूप भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए कार्यक्रम विकसित करने चाहिए।
बैठक में NCCII के सदस्यों के रूप में कई प्रमुख विशेषज्ञों और हितधारकों ने भाग लिया। जिनमें सचिव उत्तर पूर्वी परिषद, भल्ला, पूर्व संयुक्त सचिव MoEF&CC बी.एम.एस. राठौर, पूर्व निदेशक WII डॉ. जी.एस. रावत, प्रो. अनिल गुप्ता, पश्चिम बंगाल, लद्दाख, त्रिपुरा, मेघालय, जम्मू आदि के प्रतिनिधि शामिल थे।
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