अल्मोड़ा: जिले के इनाकोट में एक संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें वनाग्नि एवं मानव वन्य जीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उसके कारण एवं निपटने के तरीकों पर गहन मंथन किया गया।
लोक प्रबंध विकास संस्था तथा वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस संगोष्ठी में वन प्रभाग, सिविल सोयम वन प्रभाग तथा बिनसर वन्य जीव विहार के अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि तमाम कारणों के चलते पिछले दशकों में जंगल एवं समुदाय के रिश्तों में काफी बदलाव आया है। जंगल पर ग्रामीणों की निरभरता घटी है। बदलते परिदृश्य में वनाग्नि सामूहिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। वनाग्नि नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया गया।
सीजनल फायरवॉचरों की नियुक्ति 10 माह के लिए किये जाने, फायर लाइनों के निर्माण में तेजी लाने, ओण जलाने में सावधानी बरतने, पिकनिक स्पॉट के रूप में प्रयोग किया जा रहे स्थलों पर नजर रखने पर बल दिया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर बढ़ रहे जंगली जानवरों की आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग प्रतिभागियों द्वारा पुरजोर तरीके से उठाई गयी। इसके लिए जंगल की धारण क्षमता का अध्ययन करने, वन्य जीवों के बढ़ते नुकसान के कारणों पर शोध करने, वनीकरण में काम से कम 50% फलदार पौधों का रोपण अनिवार्य रूप से किए जाने, ट्रेंड शिकारियों के माध्यम से एक अभियान चलाकर सूअरों की संख्या नियंत्रित करने, पकड़े गए जानवरों को रखने के लिए प्रत्येक जिले में एक वन क्षेत्र को संरक्षित करने की मांग की गई।
वन क्षेत्राधिकारी मोहन राम ने बसोली ताकुला क्षेत्र से बन्दरों को पकडने तथा तेंदुओं की गतिविधियों को ट्रेक कर आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।
बैठक को वन क्षेत्राधिकारी मनोज सनवाल, वन दरोगा हरिन्द्र सतपाल, वन पंचायत संगठन के अध्यक्ष सुंदर सिंह पिलख्वाल, सचिव पूरन सिंह, डूंगर सिंह, किशोर तिवारी, देवेंद्र सिंह, बहादुर मेहता, जगमोहन चोपता, ग्राम प्रधान ज्योति डंगवाल, प्रिया भोज, गिरीश लाल, हेम दोहनी, अरुण भोज, कनिष्ठ प्रमुख निर्मल नयाल, मदन बिष्ट, क्षेत्रीय संसाधन पंचायत की अध्यक्ष पूजा बिष्ट, दीपा भाकुनी, मनीषा पांडे, बालम सिंह सुयाल, चंदन सिंह आदि ने संबोधित किया। संचालन ईश्वर जोशी ने किया।
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