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हंस आजीविका परियोजना: मशरूम उत्पादन से किसानों की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत, प्रोजेक्ट में ये गांव हैं शामिल

 

अल्मोड़ा: जिले के हवालबाग विकासखंड में हंस फाउंडेशन द्वारा संचालित हंस आजीविका परियोजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। परियोजना के तहत क्षेत्र के कई गांवों को जोड़कर किसानों को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

 

परियोजना के प्रथम चरण में मनाऊ, बलसा, सिमकुड़ी, गधोली, बिंतोला बाल्टा, ज्योली, दाड़िमखोला, बेह, दुलागांव, कनालबूंगा और पहल गांवों के किसानों को शामिल किया गया। इसके बाद दूसरे चरण में पहल, बेह मटेला, दुलागांव, कुज्याड़ी, कनालबूंगा, टकोली, मेड़ी, रेलाकोट, दाड़िमखोला, चौसली और डोबा गांवों के किसानों को भी परियोजना से जोड़ा गया। वर्तमान में इन गांवों से कुल 73 चयनित लाभार्थी इस पहल के अंतर्गत मशरूम उत्पादन कर रहे हैं।

 

लाभार्थियों को जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगि​की विश्वविद्यालय, पंतनगर में बटन मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीकों, तापमान व नमी प्रबंधन, रोग नियंत्रण तथा विपणन से संबंधित जानकारी दी गई।

 

प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक लाभार्थी को 80 बटन मशरूम कम्पोस्ट बैग तथा उत्पादन से जुड़े आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए। जिससे किसानों ने अपने स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू किया।

 

परियोजना के तहत अब तक किसानों द्वारा 4128 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन किया जा चुका है, जिससे लगभग 7,43,040 की आजीविका अर्जित की गई है। आने वाले समय में इस पहल के माध्यम से क्षेत्र में करीब 9000 किलोग्राम मशरूम उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।

 

परियोजना के तहत किसानों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन कर सकें और अपने उत्पादों को बाजार में उचित मूल्य पर बेच सके। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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