देहरादूनः उत्तराखंड में यूकेएसएसएससी के स्नातक स्तरीय पेपर लीक मामले के बाद अब कई भर्तियां जांच के घेर में आ गई है। शिकायत सामने आने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2015 में हुई पुलिस दरोगा भर्ती के भी जांच के आदेश दिए है। इसकी जांच स्वतंत्र एजेंसी विजिलेंस को सौंपी गई है। जांच के आदेश के बाद इस बैच के दरोगाओं में हड़कंप मच गया है। सात साल पहले हुई यह भर्ती तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में हुई थी।
इससे पहले शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय ने दरोगा भर्ती की विजिलेंस या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। शासन ने इसे मंजूर करते हुए जांच विजिलेंस को सौंप दी।
17606 अभ्यर्थी शामिल हुए थे परीक्षा
5 अप्रैल 2015 में पंतनगर विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित की गई इस परीक्षा में 17606 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। यह भर्तियों सिविल पुलिस, पीएसी और अभिसूचना में उप निरीक्षक पदों के लिए की गई थी। सफल अभ्यर्थियों में 104 महिलाएं भी शामिल थीं। भर्ती के परिणामों में टॉपरों की सूची भी जारी की गई थी।
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वायरल फोटो ने खोली हाकम की पोल
कुछ दिनों से पेपर लीक प्रकरण में गिरफ्तार मुख्य सरगना हाकम सिंह रावत का फोटो 2 दारोगा के साथ इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह फोटो देहरादून रिजर्व पुलिस लाइन में ली गई है। जिसमें वर्ष 2015 बैच के 2 दारोगा नजर आ रहे हैं। एसटीएफ इन फोटो की जांच कर रही थी। इस बीच एईओ दिनेश चंद्र की गिरफ्तारी के बाद दारोगा भर्ती में घपले के तथ्य और पुख्ता हो गए। आरोप है कि इस परीक्षा में ऐसे कुछ आवेदक भी दारोगा बन गए, जो सिपाही बनने के लायक नहीं थे।
हालांकि, दरोगा भर्ती की जांच की मांग को पुलिस मुख्यालय ने सिर्फ भर्ती घपले में गिरफ्तार हाकम की फोटो के आधार पर नहीं माना। सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ की पूछताछ में हाकम ने कुछ दरोगाओं के नामों का खुलासा भी किया। इसके अलावा भर्ती घपले में गिरफ्तार रामनगर के खनन कारोबारी चंदन मनराल और यूपी के केंद्रपाल ने भी कई दरोगाओं के नाम एसटीएफ की पूछताछ में बताए हैं।
इन परीक्षाओं की चल रही है जांच
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश के बाद स्नातक स्तर की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक कर नकल कराने के मामले में एसटीएफ को जांच सौंपी गई थी। इस मामले में रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज कर अब तक 24 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बाद कनिष्ठ सहायक न्यायिक, वन रक्षक और सचिवालय रक्षक भर्ती की जांच भी एसटीएफ को सौंपी गई। बीते गुरुवार को एसटीएफ की ओर से 2021 में हुई सचिवालय रक्षक भर्ती के मामले में रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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