अल्मोड़ा। जिले में सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। बीते चार नवंबर को सल्ट के मरचूला कूपी क्षेत्र में हुए भयानक बस हादसे में 36 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। लेकिन सवाल यह है कि आखिर हादसे के बाद ही परिवहन व पुलिस महकमे की नींद क्यों खुलती है। दुर्घटना के बाद विभाग का तत्काल जागना दिखावे से ज्यादा कुछ नहीं लगता।
मरचूला में हुए हादसे के बाद सरकार व सिस्टम पर तमाम सवाल उठे थे। इस हादसे के बाद जहां मुख्यमंत्री ने आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। वही, परिवहन व पुलिस विभाग भी ताबड़तोड़ चेकिंग अभियान में जुट गया है। जिले में पिछले छह दिनों में परिवहन विभाग ने 200 से अधिक चालान किए है। इस दौरान टैक्सी व बसों में ओवरलोडिंग के 33 मामले सामने आए। जिसमें आठ वाहनों को मौके पर सीज किया गया। और आठ वाहन चालकों पर डीएल सस्पेंड करने की कार्यवाही की गई। इस दौरान चालानी कार्यवाही से पांच लाख से अधिक का जुर्माना वसूला गया।
रविवार को पुलिस व परिवहन विभाग ने अल्मोड़ा—हल्द्वानी नेशन हाईवे व रानीखेत भतरौंजखान मोटर मार्ग में संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान ओवरलोडिंग व अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर 37 वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई।
एक गौर करने वाली बात यह भी है कि हादसे के बाद जैसे ही परिवहन व पुलिस विभाग सक्रिय हुआ तो सड़कों में एक छोर से दूसरे छोर तक चैकिंग की बात एक दूसरे तक पहुंचा दी गई और देखते ही देखते पर्वतीय रूट में अधिकांश ओवरलोड चलने वाले टैक्सी व केएमओयू वाहन क्षमता के बराबर ही सवारियां ढोते नजर आने लगे है। अब देखना यह होगा कि पुलिस व परिवहन महकमा क्या इसी तरह भौतिक निरीक्षण जारी रखता है या फिर कुछ दिन के बाद ही मरचूला बस हादसा अन्य हादसों की तरह ठंडे बस्ते में चले जाएगा।
आरटीओ प्रवर्तन अनीता चंद ने कहा कि भौतिक निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा और पूरी सख्ती की जाएगी। वाहन में अतिरिक्त सीट लगी होने पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वाहन चालकों, स्वामियों व यात्रियों को भी यातायात नियमों को समझना होगा।
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