-वोटिंग, साइकिलिंग, बाइक राइडिंग, मेडिटेशन सेंटर भी, पर्यटन का होगा विकास
अल्मोड़ा। प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विवधता और मनोहारी हिमालय के शानदार नजारों के लिए प्रसिद्ध सिमतोला ईको पार्क नगर का नया पर्यटन स्थल बनेगा। पार्क में बुजुर्गों के लिए मेडिटेशन सेंटर, युवाओं के लिए जिप लाइन साइकिलिंग, बाइक राइडिंग तो छोटे बच्चे वोटिंग का आनंद लेंगे। केंद्र सरकार ने नगर वन योजना के तहत करीब एक करोड़ लागत वाले प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है।
नगर के कसार देवी मार्ग में सिमतोला पहाड़ी है। बांज, देवदार, चीड़, उतीस आदि के अलावा यहां औषधि पौधे भी अच्छी खासी संख्या में हैं। यहां से हिमालय पर्वत श्रृंखला का नजारा भी काफी आकर्षक दिखता है। बर्ड वाचिंग, ट्रैकिंग, ध्यान , योग और एडवेंचर के शौकीनों लिए यह स्थल खास है।
26 हैक्टेयर में फैले इस स्थल को वन विभाग ने 2010 में विकसित किया था। हालांकि यहां बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और पर्यटन के लिहाज से कुछ भी सुविधा नहीं है। वन विभाग ने इस क्षेत्र को नए पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की योजना तैयार की है।
उपवन संरक्षक दीपक सिंह ने बताया केंद्र सरकार की नगर वन विकसित करने की योजना है। विभाग ने ईको पार्क में छोटे बच्चों के मनोरंजन को वोटिंग, स्लाइडिंग, झूले आदि युवाओं के लिए बाइक राइडिंग, जिप लाइन साइकिलिंग, ट्रैकिंग और बुजुर्गों के लिए मेडिटेशन सेंटर तैयार करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अलावा यहां जन सुविधाओं के विकास, स्थानीय व्यंजनों परोसने को केंटीन, वाच टावर, अपनों की याद में स्मृति वन स्थापित करने आदि का खाका तैयार किया है।
उपवन संरक्षक सिंह ने बताया करीब एक करोड़ लागत की इस योजना को लेकर विभाग द्वारा केंद्रीय वन मंत्रालय में प्रेजेंटेशन भी दिया जा चुका है। केंद्र सरकार ने योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। केंद्र से आदेश मिलने पर योजना का विस्तृत आगणन तैयार होगा और वित्तीय स्वीकृति के बाद जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है
पर्यटन बढ़ेगा, लोगों को मिलेगा रोजगार
अल्मोड़ा। उपवन संरक्षक दीपक सिंह का कहना है नए पर्यटन स्थल विकसित करने का मकसद स्थानीय लोगों को नगर में शांत, सुरम्य वातावरण उपलब्ध करा प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इससे जिले में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। इको पार्क में महिला समूह स्थानीय उत्पादों से व्यंजन तैयार कैंटीन चलाएंगी। तांबा, पीतल, लकड़ी, बगेट, बिच्छू घास, भांग, भीमल आदि रेशों से तैयार सजावटी सामन और उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर की कलाकृतियों को भी यहां स्टाल में बिक्री के लिए रखा जाएगा। पार्क में प्रवेश के लिए शुल्क से राजस्व अर्जित होगा और लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
India Bharat News Latest Online Breaking News