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मजदूरों के अधिकारों पर दमन के खिलाफ कड़ा प्रतिरोध, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने की कार्रवाई की निंदा

अल्मोड़ा: नोएडा, हरियाणा और उत्तराखंड में चल रहे मजदूर आंदोलनों पर पुलिसिया अत्याचार और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों की उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने कड़ी भर्त्सना की है। पार्टी ने मजदूर संघर्षों का समर्थन करते हुए गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।

 

जारी बयान में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पी. सी. तिवारी ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने, बेहतर कार्य-परिस्थितियों और शोषण के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हजारों मजदूरों पर राज्य मशीनरी द्वारा दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा बिना वारंट और बिना ठोस सबूत के मजदूरों एवं श्रमिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है, झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और आंदोलन को साजिश बताकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

 

उन्होंने कहा कि एक ओर सत्ताधारी वर्ग अपनी सभी सुविधाओं का विस्तार कर रहा है, वहीं देश की विशाल श्रमिक आबादी अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है। मजदूरों को 12-12 घंटे तक अर्द्ध-गुलामी जैसी परिस्थितियों में काम करने को मजबूर किया जा रहा है।

 

पार्टी ने बताया कि 13 अप्रैल को नोएडा में मजदूरों के शांतिपूर्ण धरने को हिंसक बताकर सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी संख्या विभिन्न रिपोर्टों में 300 से 350 के बीच बताई गई है। हरियाणा के मानेसर में भी 55 से अधिक मजदूरों, जिनमें 20 महिलाएं शामिल हैं, को हिरासत में लिया गया।

 

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी आंदोलनरत मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है। बाहरी तत्व और साजिश जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर सरकार और प्रशासन असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि असली साजिश उन नीतियों में है, जो मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी से वंचित रखती हैं, ओवरटाइम का भुगतान नहीं करतीं, बोनस रोकती हैं और असुरक्षित तथा अस्थायी रोजगार थोपती हैं। नोएडा के मजदूरों द्वारा कानूनी रूप से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी की मांग करना कोई अपराध नहीं है। गरीबी, महंगाई और शोषण के खिलाफ आवाज उठाना हिंसा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार है। वास्तविक हिंसा पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस और झूठी गिरफ्तारियों के रूप में सामने आ रही है।

 

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने सभी गिरफ्तार मजदूर एवं श्रमिक कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की जाने, सभी झूठे मुकदमे वापस लिए जाने, मजदूरों की मांगों 30,000 न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, बोनस, सुरक्षित कार्य-परिस्थितियां और स्थायी रोजगार को तुरंत लागू किए जाने एवं मजदूर आंदोलनों पर दमन बंद कर संवाद की प्रक्रिया शुरू किये जाने की मांग की है।

पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन मजदूर वर्ग के अधिकारों का संघर्ष है, न कि किसी बाहरी साजिश का हिस्सा। दमनकारी नीतियों से स्थिति और गंभीर होगी। सरकार को चेतावनी देते हुए पार्टी ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने देशभर के मजदूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों और लोकतांत्रिक शक्तियों से एकजुट होकर इस संघर्ष में साथ खड़े होने का आह्वान किया।

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