देहरादून: आर्थिक सर्वेक्षण के खुशनुमा आंकडों के बीच एक कसक भी है। उत्तराखंड इस वक्त 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बोझ तले दबा है। राज्य के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा इस कर्ज का ब्याज चुकाने में जा रहा है। हालांकि, सरकार ने हालिया चार साल में बाजार से कर्ज लेने में कमी है, इसके बावजूद ऋण राशि का आकार चिंता पैदा करता है।
दूसरी तरफ, सरकार कर्ज की राशि को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा मानती है। पत्रकार वार्ता के दौरान राज्य पर कर्ज के भारी भरकम आंकड़े पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रमुख सचिव नियोजन आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि कर्ज विकास की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि एक समय तमिलनाडु, महाराष्ट्र समेत बड़े राज्य कर्ज के बोझ की वजह से परेशान थे। लेकिन आज वो कई सेक्टर में लीड कर रहे हैं। विकास कार्यों के लिए लिया जाने वाला कर्ज कभी बुरा नहीं होता।
उन्होंने कहा कि राज्य हर सेक्टर में तरक्की की ओर बढ़ रहा है। यही वजह है कि राष्ट्रीय सतत विकास के लक्ष्य यानि एसडीजी इंडेक्स में वर्ष 2021-22 में राज्य ने चौथा स्थान प्राप्त किया था
चार साल में डेढ़ गुना बढ़ी GSDP
उत्तराखंड सरकार के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण जारी किया गया है। प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि वर्ष 2022 की तुलना में राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (Gross State Domestic Product) में डेढ़ गुना वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं प्रति व्यक्ति आय, उद्योग, स्टार्टअप और बिजली उत्पादन सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
उन्होंने पिछले चार वर्षों के तुलनात्मक आंकड़े भी सामने रखे। कहा कि 2022 में जहां प्रति व्यक्ति आय एक लाख 94 हजार थी। वो बढ़कर अब दो लाख 73 हजार हो गई है । 2022 की अपेक्षा गरीबी इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई है । 9.7% से गिरकर गरीबी इंडेक्स 6.92 फीसदी रह गया है। कहा कि राज्य में एमएसएमई सेक्टर में भी अच्छी ग्रोथ हुई है। इसके तहत 2022 में करीब 59 हज़ार उद्योग थे। पिछले चार वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर 79 हजार से अधिक पहुंच गई है। इससे करीब साढ़े चार लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है ।
केरल की तर्ज पर गर्भवतियों की निगरानी
देहरादून। आर्थिक सर्वेक्षण में मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने की सिफारिश की गई है। इसके लिए केरल मॉडल अपनाने का सुझाव भी दिया गया है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षीसुंदरम ने अपने घनसाली (टिहरी) भ्रमण का जिक्र करते हुए पिलखी क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की मृत्यु का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि यहां महिलाओं की मृत्यु में हीमोग्लोबिन की कमी बड़ी वजह थी। उचित पोषण न मिलने की वजह से महिलाओं को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। केरल ने मातृशिशु मृत्यु दर को काफी नियंत्रित किया है।
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