अल्मोड़ा: 1994 के उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सूत्रधार व 2 अगस्त 1994 को पौड़ी प्रेक्षागृह के सामने आमरण अनशन पर बैठकर राजनीतिक हलकों में खलबली मचाने वाले उत्तराखंड के गांधी कहे जाने वाले इंद्रमणि बडोनी की पुण्यतिथि पर उत्तराखंड क्रांति दल जिला कार्यकारिणी ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके द्वारा किए गए कार्याें को याद किया।
नगर एक होटल में आयोजित विचार गोष्ठी में यूकेडी के वरिष्ठ नेता गिरी चंद शाह ने कहा की इंद्रमणि बडोनी अपने जीवन काल में बचपन से ही सामाजिक सेवा में कार्य करते रहे। शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए कई सामाजिक कार्यों का निर्वाह किया। कई स्कूलों की उसे समय स्थापना की, जो कि आज माध्यमिक और उच्च माध्यमिक श्रेणी में आते हैं। साथ ही उनका राजनीतिक जीवन की शुरुआत भी गांव के प्रधान, ब्लॉक प्रमुख व 1967 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में देवप्रयाग सीट से नेतृत्व किया।
सन 1979 में उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय हुए और पूरे आंदोलन की बागडोर उनके हाथों में रही। बड़ी सरलता से आंदोलन को आगे बढ़ाने में उनकी बहुत बड़ी भूमिका रही। जिस कारण 1994 में बीबीसी लंदन की एक पोस्ट में उन्हें पर्वत का गांधी की संज्ञा दी गई। जिस कारण उन्हें उत्तराखंड का गांधी कहा जाने लगा।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष दिनेश जोशी, गिरीश नाथ गोस्वामी, महेंद्र कुमार, हिमांशु प्रसाद, प्रमोद जोशी, पंकज चम्याल, महेंद्र प्रसाद, दीपक सिंह, संतोष कुमार आदि यूकेडी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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