अल्मोड़ा: श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम् न्यास कनरा, डोल आश्रम (Shree Kalyanika Himalaya Devasthanam Kanra, Dol Ashram) में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ जारी है। शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा सुनने के लिए दूर दराज क्षेत्रों से सैकड़ों की तादात में श्रद्धालु सत्संग में पहुंचे। इस दौरान कथा सुन लोगों की आंखे नम हो गई और श्रोता भक्ति भाव में डूबे नजर आए।
श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन प्रसिद्ध कथावाचक भाईश्री रमेशभाई ओझा (Bhaishree Rameshbhai Ojha) ने कथा सुनाते हुए कहा कि, बिना हरि कथा के जीवन में मायूसी है। कथा है लाली है। जिस प्रकार पान में कत्था न हो तो मुंह में लाली नहीं आती, ठीक उसी प्रकार जीवन में कथा न हो तो जीवन में लाली नहीं आती।
भगवान पर भरोसा ही भक्ति
उन्होंने कहा कि भक्ति भगवान पर भरोसा होना है। कर्म में भक्ति मिल जाती है तो कर्म पूजा बन जाता है। चलने में भक्ति मिल जाए तो चलना यात्रा बन जाता है। देखने में भक्ति मिल जाए तो वह कथा बन जाता है। सुनने में भक्ति मिल जाए तो वह श्रवण भक्ति है। भोजन में भक्ति मिल जाए तो वह प्रसाद बन जाता है। केवल एक भक्ति के मिलाने से चीजें बदल जाती है और उसमें दिव्यता आ जाती है। भक्ति एक सामाजिक शक्ति है। भक्ति से व्यक्ति में सदभाव आता है।
कथावाचक रमेशभाई ओझा ने कहा कि व्यक्ति को हमेशा अच्छा आचरण करना चाहिए। चूंकि जगत में व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से वही सदभाव वापस मिलता है जो वह दूसरे के साथ आचरण करता है। जगत में हर व्यक्ति का सम्मान करना चाहिए, फिर चाहे वह घर में काम करने वाला कर्मचारी है क्यों न हो। व्यक्ति को सभी को सम्मान देना चाहिए।
कथा व्यक्ति में बदलाव लाने की प्रेरणा का श्रोत
कथावाचक रमेशभाई ओझा ने कहा कि सत्संग करने वाली की वाणी, विचार, सोचने का ढंग सब कुछ बदल जाता है। व्यक्ति को बदलाव खुद में लाना चाहिए जिसके लिए वह स्वतंत्र है और कथा यही बदलाव लाने की प्रेरणा का श्रोत है। कैसे जीवन में कैसे बदलाव लाया जाए यह हमें कथा ही सीखाती है। कथा सुनने से व्यक्ति को अंहकार, व्यसन, दुर्गण, दुर्भावना, दुर्विचारों समेत सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि, तुलसीदास कहते है कि सत्संग एक ऐसा चलता फिरता प्रयाग है उस प्रयाग में स्नान करने से पुण्य मिलता है। सत्संगरूपी प्रयाग में स्नान करने से जो फल मिलता है वह दिखता है और दुनिया भी व्यक्ति को खुद बदलते देखती है।
स्वभाव से दुखी व्यक्ति नहीं हो सकता सुखी
कथावाचक भाईश्री रमेशभाई ओझा ने कहा कि दुनिया के दुखी होने के तीन कारण है काल, कर्म और स्वभाव। काल व कर्म से दुखी इंसान के सुखी होने की संभावना होती है लेकिन जो व्यक्ति स्वभाव से दुखी है, उस प्राणी को संसार में कोई सुखी नहीं कर सकता। ऐसे व्यक्ति हमेशा दूसरों को भी दुखी करते है। उन्होंने कहा कि दुनिया में आज अधिकांश लोग स्वभाव के कारण दुखी है।
कथावाचक भाईश्री रमेशभाई ओझा ने कहा कि दुनिया में आज पीढ़ी का अंतर भी लोगों की एक समस्या है। जिंदगी को टुकड़ों में जीने से यह समस्या आती है। लेकिन जिंदगी को समग्रता में जीना इस समस्या का निदान है। जिससे ये समस्या आएगी ही नहीं। उन्होंने कहा कि भक्ति में बालक बनो, कर्म में युवा बनो व ज्ञान में वृद्ध बनो। भक्त भगवान का छोटा बालक है ऐसा रामचरितमानस में कहा गया है।
भजन संध्या में झूमे श्रद्धालु
श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम् न्यास कनरा, डोल आश्रम में श्रद्धालु जहां प्रतिदिन साढ़े 10 बजे से डेढ़ बजे तक श्रीमद्भागवत कथा का रसापान कर रहे है। वही, शाम 6 से 8 बजे तक भजन संध्या में श्रद्धालु कृष्ण राधा के रस में सरोबार होकर झूमते रहे। शुक्रवार को आयोजित भजन संध्या में उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोकगायिका माया उपाध्याय ने अपने मधुर कंठ से एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को झूमने के लिए मजबूर कर दिया।
इस मौके पर डोल आश्रम के संस्थापक महंत बाबा कल्याण दास जी महाराज कथा में मौजूद रहे।
ये रहे मौजूद
कथाश्रवण करने वालों में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, अल्मोड़ा विधानसभा से विधायक मनोज तिवारी, बृजमोहन अग्रवाल, यजमान चतुर्भुज अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, प्रहलाद अग्रवाल, अशोक अग्रवाल एवं उनके परिवारजन, रिश्तेदार समेत समस्त वंदना परिवार के अलावा डोल आश्रम से स्वामी कपिलेश्वरानंद, स्वामी विश्वेश्वरानंद, स्वामी जगदीशानंद, हरीश कुंजवाल, तारा चंद्र जोशी, दीवान सतवाल, नवल रावत समेत सैकड़ों की तादात में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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