इंडिया भारत न्यूज डेस्क: सस्ता गल्ला की दुकानों में मिलने वाले सरकारी नमक में रेत के मिलावट होने के आरोप सही साबित हुए है। आयोडिन युक्त नमक में रेत पाए जाने की पुष्टि हुई है। दैनिक समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक रुद्रपुर की फूड लैब में जांच के लिए भेजे गए 12 में से 10 के नमूने फेल पाए गए है।
राज्य में मुख्यमंत्री नमक पोषण योजना के तहत राशन कार्ड धारकों को आठ रुपये प्रति किलो की दर से आयोडीन युक्त नमक उपलब्ध कराया जा रहा था। यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत चल रही थी। इसका उद्देश्य प्रदेश के लगभग 14 लाख राशन कार्ड धारकों को आर्थिक सहायता और पोषण प्रदान करना था। खासकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को लाभान्वित करना।
इसी साल सितंबर माह में उपभोक्ताओं ने नमक में रेत पाए जाने की शिकायत की थी। इसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जांच के आदेश दिए थे। साथ ही अगले आदेश तक नमक वितरण पर रोक लगा दी गई। प्रदेश के सभी जिलों से 12 नमूने एकत्र कर जांच के लिए रुद्रपुर फूड लैब में भेज दिए थे। अब जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है।
पंचायत चुनाव के बीच रेत में नमक पाए जाने का मुद्दा उठा। लोगों ने सोशल मीडिया पर इसे हवा दी थी। पोस्ट कर लिखा था कि इंसानों को खिलाने वाला नमक जानवरों को खिलाना पड़ रहा है।
डिप्टी कमिश्नर फूड सेफ्टी, कुमाऊं मंडल आर.एस कठायत ने मीडिया को दिए बयान में कहा, नमक के 12 सेंपल जांच के लिए लैब में पहुंचे थे। 10 में बालू निकलने की पुष्टि हुई है। रिफाइंडिंग सही नहीं होने से नमक में बालू आई है क्योंकि समुद्र से नमक का उठान होता है। रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
नमक में रेत की पुष्टि से सरकारी राशन वितरण प्रणाली पर एक बार फिर से गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खास बात ये है कि यह नमक सरकारी ब्रांडिंग के तहत वितरित किया जा रहा है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की तस्वीर छपी हुई हैं। अब सवाल उठता है कि जिस ब्रांड के प्रचार में सरकार का भरोसा झलकता है, क्या उसी में मिलावट की शिकायतें आना एक बड़ा षड्यंत्र है?
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