Breaking News
Oplus_131072

मज़दूर दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन, रुद्रपुर से लेकर दिल्ली तक मज़दूरों के दमन पर जताई चिंता

अल्मोड़ा: अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस के अवसर पर नगर निगम सभागार में ‘वर्तमान दौर में मई दिवस की प्रासंगिकता’ विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में विभिन्न जनसंगठनों से जुड़े सदस्यों ने हिस्सा लिया।

इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि 1886 में शिकागो शहर में शांतिपुर्ण प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों पर हिंसक कार्यवाही की गई और हिंसक कार्यों का ज़िम्मा भी मज़दूर नेताओं पर थोप दिया जिनके खिलाफ केस चलाकर उन्हें फांसी की सज़ा दी गयी। इसके बाद से ही अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस की पहचान सामने आई।

 

वक्ताओं ने कहा कि शिकागो की इन घटनाओं की पुनरावृत्ति हमारे देश में भी देखने को मिल रही है। आज का दिन मज़दूरों के लिए महत्वपूर्ण इसलिए है कि 8 घण्टे के काम के अधिकार के लिए मज़दूरों को शहीद होना पड़ा था। कड़े संघर्ष के बाद ही 8 घण्टे के काम के अधिकार को मान्यता मिली। लेकिन आज पुनः नवउदारवादी अर्थव्यवस्था के चलते केंद्र सरकार ने 8 घण्टे के काम के अधिकार व अन्य अधिकारों को मज़दूरों से छीनने की कोशिश की है, जिसके खिलाफ मज़दूर संघर्षरत है।

 

वक्ताओ ने कहा सरकार ने न केवल काम के घण्टों को बढ़ाने का काम किया है वरन न्यूनतम मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन आदि अभी तक कड़े संघर्षों से अर्जित मज़दूरों के अधिकारों को छीनने का कार्य किया है। कोविड के दौरान श्रम संहिताओं को लाना और विपक्ष की अनुपस्थिति में सदन से पास करा लेना दिखाता है कि सरकार का मजदूरों के प्रति क्या रुख है। मज़दूरों के कड़े विरोध के कारण श्रम संहिताओं का नोटिफिकेशन नहीं हो सका लेकिन बिहार चुनाव के बाद ही नोटिफिकेशन जारी हुआ है, जिसका मज़दूर वर्ग ने विरोध किया है।

 

वक्ताओं ने आरोप लागते हुए कहा कि शिकागो की 1886 की घटनाओं की पुनरावृत्ति हमारे देश का शासक वर्ग कर रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में जब मज़दूर अपने न्यूनतम वेतन व अन्य मांगों को लेकर सड़क पर उतरा है और संघर्षरत है, तो शासन प्रशासन कानून का मामला बनाकर उन्हें जेल में डालने का कार्य कर रहा है।

 

उत्तराखंड में रुद्रपुर, हल्द्वानी में भी मज़दूर अपनी मांगों के लिए सड़क पर संघर्षरत है।वक्ताओं ने कहा कि आज ट्रेड यूनियन और अन्य जनवादी अधिकारों के लिए हमें मुखर होकर सामने आने की आवश्यकता है।

 

विचार गोष्ठी में सीटू के जिला सचिव आरपी जोशी, जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष सुनीता पांडे, राधा नेगी, जया पांडे, कांता नेगी, भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI) के यूसुफ तिवारी, योगेश टम्टा, भोलू, शाहनवाज़, सुशील तिवारी , विजयलक्ष्मी, नीमा जोशी, ममता भट्ट, आनंदी मेहरा, सरोज, बसंती बीना कर्नाटक, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रमोद तिवारी, अशोक पन्त, बाल प्रहरी के सम्पादक उदय किरौला, आशा भारती, दिनेश राज, विक्की आदि उपस्थित रहे। गोष्ठी की अध्यक्षता देवेन्द्र सिंह फर्त्याल एवं संचालन सुनीता पांडे ने किया।

Check Also

छह मई को उदयपुर मंदिर पहुंचेगी गोल्ज्यू संदेश यात्रा, स्वागत की तैयारियां जोरों पर

द्वाराहाट (अल्मोड़ा): उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था की प्रतीक गोल्ज्यू संदेश यात्रा आगामी 6 …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *