अल्मोड़ा: केंद्र व राज्य सरकार ने उत्तराखंड के सीमांत जिलों को संचार सेवा से जोड़ने की कवायद तेज कर दी है। अल्मोड़ा लोकसभा के कई दूरस्थ क्षेत्रो में जल्द ही बीएसएनएल के नए टावर लगने की शुरुआत हो होने जा रही है। इससे जहाँ स्थानीय लोगो को संचार सेवा उपलब्ध हो पाएगी वही, भारत के लिए यह सामरिक दृष्टि से भी काफी फायदेमंद होगा।
अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा सीट से सांसद अजय टम्टा ने शुक्रवार को दूरसंचार सलाहकार समिति की बैठक की। इस दौरान टम्टा ने कहा कि पूरे उत्तराखंड के अंतर्गत सबसे अधिक बीटीएस अल्मोड़ा लोकसभा के लिए स्वीकृत हुए है। टम्टा ने कहा कि चीन, तिब्बत, नेपाल के बॉर्डर से लगे 480 अनकवर्ड एरिया ऐसे है जिन्हें संचार सेवा से जोड़ा जाना है। जिसके बाद यहाँ के लोगों को भी घर बैठे सरकार की सभी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। इस दौरान उन्होंने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को बॉर्डर के ऐसे अनकवर्ड एरिया में बीटीएस लगाने के निर्देश दिए।
सांसद टम्टा ने कहा कि करीब पौने 200 नए टावर लगाए जाएंगे। पहले फेज में 137 व दूसरे फेज में 45 नए टावर लगाए जाएंगे। बाकायदा इसके लिए 127 लैंड चयनित कर लिए गए है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इसके लिए जमीन उपलब्ध करा दी है। इन जमीनों का सर्वे भी हो चुका है। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार का आभार जताया।
आपको बता दे कि अल्मोड़ा लोकसभा के अंतर्गत कुल चार जिले, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ व चंपावत शामिल है। जिसमें पिथौरागढ़ व चंपावत जिला अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा है। लेकिन इन जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित कई गांव ऐसे है जहां लोग आज भी सड़क व संचार सेवा से महरूम है। हाल ये है कि दो देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर स्थित पिथौरागढ़ जिले के कई सीमावर्ती गांव अभी संचार सेवा के मामले मे काफी पिछड़े हैं। इसमें नेपाल सीमा से लगे पंचेश्वर से लेकर चीन सीमा पर स्थित व्यास, चौदास, दारमा घाटियों के गांव शामिल हैं। नेपाल सीमा से लगे अधिकतर इलाकों में नेपाल की कंपनियों के सिग्नल आने से कई लोग सालों से यहां नेपाली सिम का इस्तेमाल कर रहे हैं। जो सरकार की डिजिटल इंडिया को तो आईना दिखाता ही है साथ ही सुरक्षा के लिहाज से भी गलत है।
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