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टाइगर सेंसेस: अल्मोड़ा में पहली बार होगी बाघों की गणना, इन क्षेत्रों में चलेगा अभियान, पढ़ें पूरी खबर

-वन विभाग डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से करेगा बाघों की गिनती
-WWF के विशेषज्ञों से ट्रेनिंग में बारीकियां सीखेंगे वनकर्मी

 

अल्मोड़ा। हिमालय क्षेत्र हिम तेंदुए का स्वाभाविक आवास है, लेकिन पहाड़ में ऊंचाई वाले कई स्थानों पर पिछले कुछ वर्षों में बंगाल टाइगर की मौजूदगी का पता चला है। इसलिए पहली बार जिले में बाघों की गणना होनी जा रही है। वन विभाग वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फाउंडेशन (WWF) के सहयोग से टाइगर की उपस्थिति का वैज्ञानिक विधि से अध्ययन करेगा। जिले में नौ दिसम्बर को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञ वन अधिकारियों को टाइगर सेंसेस का प्रशिक्षण देंगे।

हिमालय क्षेत्र के ऊंचाई वाले में हिम तेंदुए पाए जाते हैं। कार्बेट सहित उत्तराखंड के कई मैदानी क्षेत्रों में बंगाल टाइगर की अच्छी खासी तादाद है। माना जाता रहा कि पर्वतीय क्षेत्र के जंगलों में बाघ की पहुंच नहीं है। यहां तेंदुए ही पर्याप्त संख्या में हैं।

पिछले कुछ वर्षों में पर्वतीय क्षेत्र के कम ऊंचाई वाले क्षेत्र में भी टाइगर दिखने की बात सामने आई। बिनसर और जागेश्वर के इलाके में दो साल पहले बाघ बिचरण की तस्वीरें कमरे में कैद हुई थीं। अभी कुछ दिन पहले ही बागेश्वर जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्र में हिम तेंदुए और अल्पाइन पारिस्थितिक तंत्र संरक्षण के अध्ययन में जुटे वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को वहां बंगाल टाइगर की मौजूदगी का पता चला।

 

3010 मीटर की ऊंचाई पर सुंदर ढूंगा घाटी में बंगाल टाइगर ट्रैप कैमरा में नजर आया। यह घटना हिमालय की सबसे ऊंचाई पर बाघ पाए जाने का पुष्ट प्रमाण है। इसलिए मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ पहली बार पर्वतीय क्षेत्रों में भी बाघों की गणना होनी जा रही है।

 

परंपरागत वासस्थल छोड़ नए ठिकाने बना रहे जानवर

अल्मोड़ा। वन्यजीवों के स्वाभाविक वासस्थलों से अन्यत्र मौजूदगी को ग्लोबल वार्मिंग, जंगलों के बीच आवागमन गतिविधियां बढ़ने और कई जानवरों की संख्या में बढ़ोतरी हो जाने के साथ ही जैव विविधता की मजबूती से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक जंगलों में पर्याप्त भोजन, रहने, छिपने आदि की कमी और संख्या बढ़ जाने के कारण भी जानवर परंपरागत वासस्थलों को छोड़ अपने प्राइड की स्थापना को चुनौती और जोखिम भरे नए स्थलों को ठिकाना बना रहे हैं।

 

हर चार साल में होती हैं बाघों की गणना

अल्मोड़ा। वन विभाग मैदानी क्षेत्रों में हर चार साल में बाघों की गणना करता है। 2022 में यह गणना हुई थी, अब 2026 में बाघों की गणना का काम होना है। इस बार गणना में बंगाल टाइगर के स्वाभाविक वास स्थलों के अलावा पहली बार जिले के बिनसर, जागेश्वर, मोरनौला और द्वाराहाट क्षेत्र के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बाघ की मौजूदगी का पता लगाने को अभियान चलेगा। वन विभाग के अधिकारियों को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञ इस बारे में प्रशिक्षित करेंगे।

 

 

बाघों की गणना में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की विशेषता मानी जाती है। कुछ महीने बाद देशभर में बाघों की गणना शुरू होनी है। वन विभाग भी जिले में बाघों की मौजूद का पता लगाने को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञों की सहायता लेगा। विशेषज्ञ ट्रैप कैमरा, केमिकल टेस्ट और अन्य वैज्ञानिक विधि से बाघों की स्थिति का पता लगाएंगे। जिले वन अधिकारियों को नौ दिसम्बर को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञ प्रथम चरण का प्रशिक्षण देंगे। जिले के बिनसर, जागेश्वर, मोरनौला और द्वाराहाट के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बाघों की मौजूदगी के वैज्ञानिक प्रमाण जुटाए जाएंगे।
-दीपक सिंह, उपवन संरक्षक, अल्मोड़ा।

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