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सड़क से नहीं जुड़ पाया अल्मोड़ा का यह गांव, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष दीवान सतवाल ने दी यह चेतावनी

अल्मोड़ा: लमगड़ा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष दीवान सतवाल ने सरकार से जागेश्वर विधानसभा के ग्राम सभा नैणी (जिफल्टा) व कोकिलागांव को सड़क मार्ग से जोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक माह के भीतर अगर इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई तो वह केंद्र, राज्य सरकार एवं स्थानीय सांसद की बुद्धि सुद्धि के लिए हवन यज्ञ करेंगे और साथ ही ग्रामीणों के साथ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है।

प्रेस को जारी एक बयान में सतवाल ने कहा कि आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी नैणी व कोकिलागांव के ग्रामीणों को सड़क मार्ग से वंचित रखा गया है। इसके विरोध में ग्रामीणों ने 2019 के लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया था, तब एक भी ग्रामीण ने अपने मत का इस्तेमाल नहीं किया। लेकिन चुनाव जीतने के बाद सांसद अजय टम्टा और प्रदेश सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। सरकार व सांसद की बेरूखी से नैणी व कोकिलागांव आज तक सड़कविहीन है।

 

सतवाल ने कहा कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व तत्कालीन स्थानीय विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने जिफल्टा से नैणी, विशौतकोट तक 10 किमी लंबी सड़क के लिए साल 2016 में शासनादेश जारी कर 53 लाख रुपये की धनराशि टोकन मनी के रूप में स्वीकृत करायी थी। तथा विभाग से सर्वे कर सम्बन्धित कर भूमि हस्तान्तरण के लिए निर्देशित भी कर दिया था। लेकिन 2017 में गोविन्द सिंह कुंजवाल निर्वाचित हुए लेकिन प्रदेश में भाजपा सरकार विराजमान हुई। तब भी कुंजवाल भूमि हस्तान्तरण के लिए लगातार सरकार पर दबाव बनाते रहे। लेकिन प्रदेश सरकार व भाजपा नेताओं ने राजनैतिक द्वेषभावना के कारण स्वीकृत सड़क के लिए भूमि हस्तातरण करने में सहयोग नहीं किया।

 

सतवाल ने कहा कि भाजपा नेताओं ने तुलेड़ी से नैणी गांव तक सड़क के लिए एक नया शासनादेश जरूर कराया। लेकिन बावजूद इसके वह इन गांवों को सड़क से नहीं जोड़ पाए। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेश सरकार पलायन को रोकने का दावा करती है दूसरी ओर लोग सड़क सुविधा नहीं होने से गांव छोड़ने को मजबूर है। इससे भाजपा की कथनी व करनी में साफ अंतर दिखता है।

दीवान सतवाल ने इस मामले में सीएम को ज्ञापन भेज शीघ्र कार्यवाही करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर एक माह के भीतर कार्यवाही नहीं हुई तो केंद्र व राज्य सरकार के साथ ही स्थानीय सांसद की बुद्धि सुद्धि के लिए हवन करेंगे। इसके बाद भी सरकार नहीं चेती तो वह ग्रामीणों के साथ उग्र आंदोलन करेंगे।

 

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