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विधायक मनोज तिवारी ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- नियमावली के अनुसार नहीं चलाया जा रहा विस सत्र, धामी सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

अल्मोड़ा: विधायक मनोज तिवारी ने कार्य संचालन नियमावली के अनुसार विधानसभा सत्र नहीं चलाए जाने पर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। तिवारी ने कहा कि सरकार ने मानूसन सत्र को पिछले सत्रों की तरह बहुत ही कम दिनों के लिए चलाया। बावजूद इसके विपक्ष ने लोगों की आवाज बनकर सदन में दमदार तरीके से कई मुद्दों को सदन में रखकर सरकार को घेरने का काम किया। उन्होंने जनहित के कई मुद्दों व कर्मचारियों के हित से जुड़े मामलों में सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

यहां नगर के एक होटल में पत्रकार वार्ता के दौरान विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि कार्य संचालन नियमावली के अनुसार साल के 3 सत्रों में कम से कम 60 दिन विधानसभा के सत्र चलाऐ जाने चाहिए थे। इस साल अभी हाल के मानसून सत्र सहित विधानसभा केवल 7 दिन चली है। इसमें से भी शोक वाले दिन भी सम्मलित हैं जिनमें शोक प्रस्ताव पर चर्चा के अलावा कोई कार्य नहीं होता है। विपक्ष ने विधानसभा सत्र को कम दिन चलाने का विरोध करते हुए मानसून सत्र के काल को बढ़ाने की मांग सरकार के सामने रखी, लेकिन सरकार ने सत्र नहीं बढ़ाया।

तिवारी ने कहा कि सरकार विधानसभा में महत्वपूर्ण विषयों पर विधेयक नहीं ला रही है। ऐसे में उन्होंने स्वयं कांग्रेस विधायक दल की ओर से राज्य में उपनल, तदर्थ, संविदा, अंशकालिक आदि अस्थाई सेवाओं को कर रहे करीब 40 हजार युवाओं की सेवाओं के विनियमितीकरण यानि स्थाई करने के उद्देश्य से ‘उत्तराखण्ड आउटसोर्स कर्मचारी विधेयक 2023’ विधानसभा में पेश किया। लेकिन कांग्रेस विधायक दल की संख्या कम होने से बिल गिर गया।

तिवारी ने कहा कि राजस्थान, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश में अस्थाई कर्मचारियों की सेवाओं को स्थाई करने की नियमावली बनाई गई है। इस मामले में हाईकोर्ट से कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय हुआ। लेकिन प्रदेश सरकार इस निर्णय के ​खिलाफ हाईकोर्ट गई। इससे सरकार की मंशा स्पष्ट होती है।

तिवारी ने कहा कि प्रदेश में लगातार भू माफियाओं का दखल बढ़ रहा है। बाहर से आए लोग प्रदेश में बड़े पैमाने पर जमीन खरीद रहे है। पूर्व में बाहरी लोगों के लिए राज्य में भूमि खरीदने की सीमा तय थी। लेकिन 6 अक्टूबर 2018 को त्रिवेंद्र रावत की नेतृत्व वाली भाजपा सरकार असीमित भूमि खरीद का अध्यादेश लेकर आई। जिसमें बाहरी राज्यों के लोगों के लिए उत्तराखंड में भूमि खरीद की सीमा को समाप्त कर दिया गया। तिवारी ने कहा कि आज राज्य में सशक्त भू-कानून की जरूरत है। सदन में प्रदेश सरकार से हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर भू-कानून लाने की मांग उठाई गई।

तिवारी ने कहा कि केवल दो दिन चले सदन में उन्होंने नियम 310 और 58 के अंतर्गत राज्य में अतिक्रमण के नाम पर सरकारी विभागों द्वारा तबाही करने, भू-कानून, कानून व्यवस्था, जंगली जानवरों का आतंक, उपनल, तदर्थ, संविदा, अंशकालिक कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन व उनके लिए सेवा नियमावली बनाए जाने आदि मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया गया।

तिवारी ने कहा कि अगर सरकार जन मुद्दों को सुन उनका समाधान चाहती है तो विधानसभा संचालन नियमावली के अनुसार ही सत्र को पूरी समयावधि तक चलाया जाए।ताकि उत्तराखंड के जन मुद्दों को सत्र के दौरान सदन के पटल में रख उनका समाधान कराया जा सके।

प्रेसवार्ता में नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, जिलाध्यक्ष कांग्रेस भूपेंद्र सिंह भोज, नगरध्यक्ष तारा चंद्र जोशी, जिलाध्यक्ष महिला कांग्रेस राधा बिष्ट, कांग्रेस महामंत्री संगठन त्रिलोचन जोशी, पूरन रौतेला आदि मौजूद रहे।

 

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