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विकसित कृषि संकल्प अभियान: अल्मोड़ा में कृषि वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर लोगों को नई तकनीक और उन्नत किस्मों को लेकर कर रहे जागरूक

अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालबाग (ICAR-Vivekananda Parvatiya Krishi Anusandhan Sansthan) का राष्ट्रव्यापी ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ जारी है। कृषि में नवाचार और समृद्धि का संकल्प लेकर संस्थान की चार टीमों द्वारा हवालबाग, सल्ट, स्याल्दे और चौखुटिया विकासखंडों का भ्रमण किया गया।

डॉ पंकज कुमार मिश्रा, डॉ. अनुराधा भारतीय एवं डॉ. गौरव वर्मा के दल द्वारा हवालबाग के चौना एवं रनखिला गावों का भ्रमण कर वहां 114 कृषकों के साथ संवाद किया गया और किसानों को कृषि से संबंधित फसल बीमा योजना, पशुपालन, बागवानी, खेतों के लिए सौर ऊर्जा आधारित योजनाएं, वन्यजीवों से सुरक्षा, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं, नई तकनीकों जैसे कि बीज की उन्नत किस्में, संरक्षण, फसल कटाई के बाद की प्रोसेसिंग एवं यंत्रीकरण आदि के बारे में जागरूक किया गया जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।

संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत एवं मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने चौना गांव पहुंचकर कृषकों को कृषि एवं बागवानी से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। चर्चा के दौरान किसानों ने वन्यजीवों से होने वाले नुकसान पर गंभीर चिंता जताई, जो कृषि के प्रति उनकी रुचि को प्रभावित कर रहा है। साथ ही, किसानों ने कृषि इनपुट जैसे उन्नत नस्लों के पशु, कृषि रसायन और फलदार पौधों की समय पर उपलब्धता को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

कृषकों ने टीम को अवगत कराते हुए कहा कि, गांव के छोटे किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है न्यूनतम 400 वर्गमीटर की शर्त उनके लिए बाधा बन रही है। इस गावों के कृषकों ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के प्रति अपनी रूचि दर्शायी और कहा कि राज्य सरकार का इस योजना के लिए लक्ष्य बहुत कम है। उन्होंने इस लक्ष्य को सरकार से बढ़ाने का अनुरोध किया।

डॉ राजेश कुमार खुल्बे, डॉ. अमित कुमार और देव सिंह पंचपाल की टीम द्वारा सल्ट ब्लॉक के कुणीधार, नाहटनौला, सिवनलीहीट, बसीसीमार, मनसुभाखली एवं क्वेराला गावों में 72 कृषकों से संपर्क कर उन्हें खरीफ फसलों से सम्बंधित जानकारी जैसे उन्नत प्रजाति, उनकी सस्य क्रियाओं, सुरक्षा, लघु यंत्रों आदि प्रदान कर उनकी प्रतिक्रियाएं भी ली गयीं।

डॉ. दिनेश जोशी, डॉ. प्रियंका खाती एवं डॉ देवेंदर शर्मा द्वारा चौखुटिया ब्लॉक में रामपुर और भगोटी में दो स्थानों का भ्रमण किया। रामपुर में कुल 3 गांवों को शामिल किया गया, जिसमें 6 पुरुष और 69 महिला किसान सहभागी रहे। किसानों ने चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लिया और उनकी प्रमुख समस्याएं गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता और वन्यजीवों से होने वाला नुकसान थीं। कृषकों ने अपने खेतों की सुरक्षा के लिए सौर बाड़बंदी (Solar Fencing) की भी मांग की। साथ ही इस टीम ने भगोटी में भी 3 गांवों को शामिल किया गया, जहां 40 पुरुष और 33 महिला किसानों ने भाग लिया।

यह क्षेत्र मुख्यतः खरीफ मौसम में धान की खेती में संलग्न है, और किसानों ने पौधों के गिरने (lodging) से बचाव हेतु अच्छी गुणवत्ता की बौनी किस्मों की मांग की। यहां के किसान प्रगतिशील थे और उन्होंने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

डॉ अशोक कुमार, डॉ. जय प्रकाश आदित्य एवं धीरज दुबे के नेतृत्व में टीम ने इंटर कॉलेज मालीखेत, न्याय पंचायत– गोलना (पायलगांव, कफलगैर, बरांगर) में भ्रमण किया और 105 किसानों के साथ संवाद किया। वैज्ञानिकों ने संस्थान द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विकसित उन्नत किस्मों एवं तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से लाल धान (रेड राइस) की खेती पर जोर दिया, क्योंकि इसकी बाजार में श्वेत धान की तुलना में अधिक कीमत मिलती है। राज्य सरकार की लाल धान के लिए उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाने की सलाह दी।

इसके अतिरिक्त उन्होंने खरीफ मौसम के लिए सोयाबीन, गहत, कुल्थ, सफेद मडुआ (फिंगर मिलेट) जैसी अन्य फसलों की उन्नत किस्मों की जानकारी भी किसानों को दी। इन सभी ब्लॉकों एवं गावों में राज्य कृषि विभाग, बागवानी, पशुपालन, रेशम उत्पादन एवं सहकारी विभाग के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों को कृषि एवं सहवर्ती क्षेत्रों से संबंधित केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। बागवानी विशेषज्ञ ने पॉलीहाउस, नेट हाउस जैसी योजनाओं तथा इनमें मिलने वाली सब्सिडी की जानकारी दी, जिससे किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।

किसानों ने बंदरों, जंगली सूअरों द्वारा फसलों को पहुंचाई जा रही हानि तथा आवारा पशुओं की समस्या को प्रमुखता से उठाया। विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में किसान सुगंधित फसलों की खेती को विकल्प के रूप में अपना सकते हैं। किसानों ने मधुमक्खी पालन तथा रेशम पालन (सेरीकल्चर) पर विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित करने का अनुरोध भी किया।

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