जांच में पहले दिन मिली भारी अनियमितताएं, विभाग ने बिना नंबर दर्ज टिनों को किया जब्त
अल्मोड़ा। लीसा नियमावली और शर्तो को दरकिनार कर अवैध रूप से लीसा दोहन करने का मामला सामने आने के बाद वन विभाग हरकत में आ गया है। संबंधित वन पंचायतों के चार मेटों (निविदाकर्ताओं) पर लीसा नियमावली के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले में कड़ा रूख अख्तियार करते हुए प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह ने विभागीय जांच के निर्देश दिए है। और बिना नंबर वाले कई टिनों को जब्त किया गया है।
जांच में पहले दिन ही संबंधित वन पंचायतों में लीसा दोहन में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। वन पंचायतों में यह अवैध कार्य किसी शह पर हो रहे थे, यह जांच के बाद ही पता लगेगा। मामले के बाद जिम्मेदार वन कर्मियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।
गौरतलब है कि मुख्यालय से लगी खत्याड़ी, बड़सीमी, चौंसली, देवली वन पंचायत में ठेकों के माध्यम से लीसा दोहन किया जा रहा है। नियमों व शर्तों को ताक पर रखकर लीसा गड़ान, पेड़ों पर नियमों से अधिक घाव, निर्धारित से अधिक और तय गोलाई से छोटे पेड़ो से लीसा निकालने की शिकायत मिली थी।
मामले को डीएफओ दीपक सिंह ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने टीम गठित कर तत्काल अधिकारियों को जांच के लिए मौके पर भेजा। डीएफओ ने बताया प्राथमिक जांच में शिकायत सही पाई गई है। अनियमितताएं मिलने के बाद चारों वन पंचायतों के संबंधित मेटों (निविदाकर्ताओं) के खिलाफ लीसा नियमावली के तहत केस दर्ज कर लिया है। उन्होंने बताया वन पंचायत में लीसा जमा करने को बगैर नंबर पाए 75 टिन (कनस्तर) जब्त कर लिए हैं।
डीएफओ ने बताया कि जांच दल द्वारा 15 दिन में रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जिसके बाद संबंधित निविदाकर्ताओं पर जुर्माना और ब्लैक लिस्ट करने की कार्रवाई होगी। इस मामले में जिम्मेदार वनकर्मी दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होगी।
जिला मुख्यालय में हुई बैठक में डीएफओ ने सभी मातहत कर्मचारियों को वन पंचायत या विभागीय जंगलों में अवैध गतिविधियां पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। किसी भी प्रकार की हीलाहवाली व लापरवाही बरतने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
सूत्रों के मुताबिक जिन जिम्मेदार वन कर्मियों और अधिकारियों ने अब तक आंखें मूंद रखी थीं मामला प्रकाश में आते ही वह भी जंगल में गश्त करते दिख रहे हैं। डीएफओ के कड़े रुख से भी लापरवाह वनकर्मियों को विभागीय जांच में फंसने का डर भी सता रहा है। अब देखना है कि डीएफओ इस पूरे मामले में आगे क्या एक्शन लेते हैं।
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