जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान में मनाया गया वार्षिकोत्सव समारोह
अल्मोड़ा। गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान में पं. गोविन्द बल्लभ पंत की जयंती और स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर संस्थान में भारतीय परा हिमालय के चरागाहा क्षेत्र: परितंत्रीय सेवाओं और पशुचारण आधारित आजिविकाओं की निरंतरता विषय पर व्याख्यान हुआ।
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के पूर्व डीन डॉ जीएस रावत ने अपने व्याख्यान में हिमालयी क्षेत्रों में चरागाही क्षेत्रों और मानव जीव संघर्ष कि बारीकियों से अवगत कराया। भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लद्दाख, चांगथांग, लाहौल–स्पीति, किन्नौर तथा उत्तरी सिक्किम के रेंजेलैण्ड की स्थिति पर चर्चा की। अपने व्याख्यान के माध्यम से उन्होंने परा हिमालयी क्षेत्र के चरागाहों का क्षरण, शीतकालीन चारे की कमी, ऑफ-रोड ड्राइविंग से वन्यजीव विखंडन, स्थानीय विलुप्ति का खतरा, पर्यटन आधारित कचरा, जलवायु परिवर्तन, चरम मौसमी घटनाएं, नीतिगत अभाव, संस्थागत समन्वय की कमी जैसे ज्वलंत मुद्दों को उजागर किया। उन्होंने सामुदायिक संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों, पर्यावरण अनुकूल पर्यटन के लिए एसओपी तथा सामुदायिक संस्थाओं को सशक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने संस्थान द्वारा चलाये जा रहे आजीविका वर्धन में सहायक तथा शोध कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वनाग्नि से प्रतिवर्ष सैकड़ो जीव जंतुओं और वनस्पतियों को नुकसान पहुंचता है और उनके जीवन को प्रभावित करता है। उन्होंने संस्थान से वनाग्नि की रोकथाम के लिए उचित दिशानिर्देश और कार्ययोजना बनाने की भी अपील की।
विशिष्ट अतिथि डा. राजेन्द्र डोभाल ने हिमालय में दीर्घकालिक जलवायु मॉडलिंग और खगोल-भौतिकीय अध्ययनों के समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा जो आज चिंता का विषय बनी हुई है पर हमें काफी शोध कार्य करने की आवश्यकता है।
संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ आईडी भट्ट ने अतिथियों को संस्थान तथा इसकी क्षेत्रीय इकाइयों द्वारा हिमालयी क्षेत्रों में किये जा रहे विभिन्न शोध और विकासात्मक कार्यों से अवगत कराया।
कार्यक्रम में डीएम आलोक कुमार पांडेय, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार साहनी, पद्मश्री डा. अनूप साह, प्रो. एसपी सिंह, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश शर्मा ने अपने विचार रखे।
संस्थान के नए प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव नमिता प्रसाद, वैज्ञानिक डा. सुसेन जॉर्ज, डा. एसके नन्दी, प्रो. जेसी कुनियाल ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
यहां महापौर अजय वर्मा, डीएफओ दीपक सिंह, पद्मश्री डा. ललित पाण्डे, प्रो. आरके मैखुरी, प्रो. जेएस रावत, प्रो. एलएम तिवारी, प्रो. पीके सामल, पीसी तिवारी समेत कई लोगों ने प्रतिभाग किया। संचालन डा. प्रतीक्षा जोशी एवं पर्णिका गुप्ता ने किया।
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