अल्मोड़ा। ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार कई तरह की योजनाएं चला रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा संचालित गोट वैली योजना पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से अल्मोड़ा जिले के विभिन्न विकासखंडों के कई पशुपालक अपनी आजीविका को मजबूत कर रहे हैं। बकरी पालन से हर पशुपालक को साल में औसत एक लाख रुपए की आय हो रही है।
बकरी को पशुपालक की नगदी माना जाता है। जरूरत पड़ने पर पशुपालक को बकरी बेचने पर नकदी मिल जाती है। बकरी पालन में बहुत अधिक खर्च की जरूरत भी नहीं होती। पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करने के लिए सरकार ने गोट वैली योजना चलाई है। पशुपालन विभाग ने पिछले वर्ष पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जिले के हवालबाग ब्लॉक में योजना शुरू की। यहां 106 पशुपालकों का चयन हुआ। जिसमें 80 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। लाभार्थी को 20 बकरी और एक बकरा दिया गया।
इसके बाद लमगड़ा और भैसियाछाना विकासखंड के 50-50 पशुपालकों को गोट वैली योजना से लाभान्वित किया गया। ताकुला ब्लॉक के 54 और द्वाराहाट में 126 पशुपालकों का अब तक चयन कर लिया गया है। इन ब्लाकों में चयन की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। सरकार की इस योजना से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को काफी फायदा मिल रहा है। योजना से लाभान्वित हर बकरी पालक साल में औसत एक लाख की आय कर रहा है।

सरकार संचालित गोट वैली योजना (बकरी पालन) पर्वतीय क्षेत्र के पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रही है। हवालबाग, लमगड़ा, भैसियाछाना आदि ब्लाकों में योजना से लाभार्थियों को अच्छी आय हो रही है। प्रत्येक लाभार्थी हर साल 90 हजार से एक लाख से अधिक की आय अर्जित कर रहा है। इस वर्ष ताकुला और द्वाराहाट ब्लॉक में लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया जारी है। हर लाभार्थी को 20 बकरी और एक बकरा दिया जाएगा।
—डॉक्टर योगेश अग्रवाल, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, अल्मोड़ा।
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