अल्मोड़ा। अतिथि शिक्षक अब स्कूलों में शिक्षण के अलावा अन्य कोई कार्य नहीं करेंगे।। मांगों पर सरकार व अधिकारियों की बेरूखी व कोरे आश्वासन से नाराज होकर अतिथि शिक्षकों ने यह फैसला किया है।
अतिथि शिक्षकों ने जारी एक बयान में कहा कि लंबे समय से अपनी दो सूत्रीय मांग सुरक्षित भविष्य एवं वेतन वृद्धि को लेकर संघर्ष कर रहे है। पिछले वर्ष उन्होंने 15 दिन का आंदोलन भी किया। जिसमें सरकार ने उनको 60 दिन में हल निकालने का अश्वासन दिया था। आश्वासन तो पूरा नहीं हुआ इसके उलट शीतकाल और ग्रीषमकाल का वेतन काटा जाने लगा। कहा कि पंचायत चुनाव से पहले जिले के अतिथि शिक्षक जिलाधिकारी से मिले। लेकिन डीएम के स्तर से भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। जून माह का वेतन ना मिलने के बावजूद अतिथि शिक्षकों ने पूरे मनोयोग से चुनाव ड्यूटी निभाई। इसके बाद भी अतिथि शिक्षकों की हाथ सिर्फ निराशा लगी।
सरकार की इस बेरुखी से आहत होकर अतिथि शिक्षकों ने केवल अपने मूल विषय का ही अध्यापन कार्य करने का निर्णय लिया है। कक्षा अध्यापक, प्रधानचार्य द्वारा आवंटित विषय, बोर्ड ड्यूटी या अन्य कोई भी गैर शैक्षिक गतिविधि में शामिल नहीं होगे। इस मामले में ताकुला के अतिथि शिक्षकों ने खंड शिक्षा कार्यालय पत्र सौंपकर उनकी किसी भी गतिविधियों में ड्यूटी ना लगाने का स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की गई है। पत्र में कविता कांडपाल, मोहम्मद फुरकान, अंकित कुमार, बसंत बल्ल्भ जोशी, दीप चंद्र जोशी, रीता भाकुनी, गीता, विकास साह, भूपेंद्र आगरी आदि के हस्ताक्षर हैं।
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