इंडिया भारत न्यूज़ डेस्क: सफलता की अंधी दौड़ और उम्मीदों के भारी बोझ में एक मेधावी छात्रा ने अपनी जान दे दी। 10 वीं की होनहार छात्रा ने महज इसलिए मौत को गले लगा लिया क्योंकि उसके 92 प्रतिशत अंक आए थे। वह 95 प्रतिशत से अधिक अंकों की उम्मीद कर रही थी। परिणाम घोषित होने के बाद से छात्रा मायूस थी। छात्रा ने यह आत्मघाती कदम इतने से पहले अपने कुछ दोस्तों को मोबाइल पर वॉयस रिकॉर्डिंग भेजी थी।
यह मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर में पनकी रतनपुर शिवालिक भवन का है। छात्रा वैशाली सिंह (16) अर्मापुर स्थित केंद्रीय विद्यालय में सीबीएसई बोर्ड से 10 वीं की छात्रा थी। परिवार में मां काजल और भाई प्रिंस (19) है। प्राइवेट कर्मी पिता वीरेंद्र सिंह की दो साल पहले मौत हो चुकी है। काजल एक मॉल में काम करती हैं। प्रिंस कुछ साल पहले पढ़ाई छोड़ चुका है और घर पर ही रहता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक काजल ने बताया कि वह मॉल गई थीं। दोपहर करीब 3 बजे से लेकर शाम पांच बजे तक बेटी को कई कॉल की, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। उन्होंने प्रिंस को कमरे में भेजकर बात कराने के लिए कहा। प्रिंस कमरे में पहुंचा तो वैशाली का शव फंदे पर लटका था।
मैं एक जिंदा लाश बनकर रह गई हूं…
खुदकुशी से पहले छात्रा ने अपने कुछ दोस्तों को मोबाइल से वॉयस रिकार्डिंग भेजी थी। इसमें छात्रा कह रही है कि मेरे से अब जिया नहीं जाएगा… मैं एक जिंदा लाश बनकर रह गई हूं… अब मुझे जीने की इच्छा नहीं है। मुझे बहुत डर लगता है… मां मुझ पर इतना पैसा खर्च कर रही हैं… कहीं उनका पैसा बर्बाद न हो जाए।
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