अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने चिन्हीकरण, पेंशन, क्षैतिज आरक्षण समेत विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को चौघानपाटी गांधी पार्क में धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान जोरदार नारेबाजी कर सरकार को चेताने का काम किया।
धरनास्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय तक राज्य आंदोलन में रहे तमाम राज्य आंदोलनकारियों की भावना थी कि गैरसैंण को राज्य की स्थाई राजधानी बनाया जाए। लेकिन जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण स्थाई राजधानी आज तक नहीं बन पाई। सरकार पर राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन राज्य आंदोलनकारियों ने जेलों में रहकर पुलिस का दमन व प्रताड़ना सही, उसमें में कई का चिन्हीकरण तक नहीं हो सका। जिसके चलते उन्हें सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को शीघ्र लागू करें और पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार बढ़ते पलायन की रोकथाम के लिए ठोस नीति बनाए।
वक्ताओं ने कहा कि जब से मुख्यमंत्री ने राज्य में भू कानून लागू करने का शिगूफा छेड़ा है तब से बाहरी लोगों द्वारा भूमि खरीदने की बाढ़ सी आ गई है। जिससे उन्हें आशंका है कि भू कानून की घोषणा कहीं सरकार द्वारा शीघ्र धन बंटोरने की मंशा से तो नहीं की गई है। राज्य आंदोलनकारियों ने कहा राज्य आंदोलनकारी नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के सरकारी कार्यक्रम में भागीदारी न कर अपने स्तर से स्थापना दिवस मनायेंगे तथा उत्तराखंड की मूलभूत समस्याओं के लिए आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे।
धरना प्रदर्शन में राज्य आंदोलनकारी ब्रह्मानंद डालाकोटी, महेश परिहार, शिवराज बनौला, बसंत बल्लभ जोशी, बहादुर राम, सुन्दर सिंह, गोपाल सिंह बनौला, विशम्भर पेटशाली, दिनेश चन्द्र शर्मा, मोहन सिंह भैसोड़ा, पान सिंह, तारा दत्त तिवारी, कैलाश राम, गोविन्द राम, दौलत सिंह बगडवाल, सुशील चन्द्र, तारा दत्त भट्ट, जीवन चन्द्र उप्रेती, हेम चन्द्र जोशी, कृष्ण चन्द्र डालाकोटी, दीवान सिंह, गोपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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