अल्मोड़ा। उदयशंकर संगीत एवं नाट्य अकादमी, फलसीमा में नृत्य सम्राट स्व. उदय शंकर की 125 वीं जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर ममता जीना, यूसुफ तिवारी तथा अन्य लोगों ने दीप प्रज्वलित कर उनके चित्र पर माल्यार्पण किया।
अकादमी के प्रभारी डॉ. चन्द्र सिंह चौहान ने उदयशंकर की जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उदय शंकर ने अपनी नृत्य विद्या अल्मोड़ा में 1939 से प्रारम्भ की। उनके साथ गुरू शंकरन नम्बूदरी (कथ्थक कली) तनजौर, उस्ताद अलाउद्दीन खान (संगीत) मेहार, गुरू कण्डप्पा पिल्लई (भारतनाट्म) मद्रास, गुरू अमोबी सिंह (नृत्य) सेंटर में प्रशिक्षक तथा अमला शंकर, राजेन्द्र शंकर, सिमकी, जोहरा सहगल, रोबिन्द्रा, माधवन, वीएस जोग (वायलिन) तथा विष्णु दास सिराली (संगीत निर्देशक) आदि सहयोगी कलाकार के रूप में जुड़े। सन् 1939 में सेंटर के ग्रुप ने आल इण्डिया भ्रमण के लिए अल्मोड़ा छोड़ा और सम्पूर्ण भारत में नृत्य की 88 प्रस्तुतियां कीं। अल्मोड़ा में भी अनेक स्थानीय कलाकारों ने प्रतिभाग किया। उदयशंकर से उनके नृत्य विद्या को सीखा।उनके प्रिय शिष्य चिरंजी लाल साह, शंकर लाल साह आदि थे।
इस अवसर पर हरेन्द्र सिंह नेगी, रविन्द्र अधिकारी, सूरज सिराड़ी, जगत सिंह मेहरा, प्रेमा बोरा आदि मौजूद रहे।
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