इंडिया भारत न्यूज़ डेस्क: अधिशासी अभियन्ता, राष्ट्रीय राजमार्ग खण्ड, लोक निर्माण विभाग, श्रीनगर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के विरोध में इंजीनियर्स ने डीएम पौड़ी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखण्ड इंजीनियर्स फेडरेशन ने डीएम द्वारा की गई कार्रवाई जो एक तरफा, मनमानी पूर्ण एवं तानाशाही करार दिया है। फेडरेशन ने इसके विरोध में आंदोलन करने का ऐलान किया है।
उत्तराखण्ड इंजीनियर्स फेडरेशन की प्रान्तीय कार्यकारिणी द्वारा रविवार को वर्चुअली आपात बैठक आहूत की गई। बैठक में उत्तराखण्ड इंजीनियर्स फेडरेशन के प्रान्तीय पदाधिकारी एवं लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, उत्तराखण्ड पेयजल विभाग, उत्तराखण्ड पावर काॅरपोरेशन लिमिटेड, लघु सिंचाई विभाग, ग्रामीण निर्माण विभाग, पावर ट्रांसमिशन काॅरपोरेशन आफ उत्तराखण्ड लिमिटेड, उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लिमिटेड के अभियन्ता एसोसिएशनों के प्रतिनिधि सम्मिलित रहे।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि 11 सितंबर को को अत्यधिक वर्षा होने के कारण श्रीनगर से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग लगभग 40-45 मी. वाशआउट हो गया था और यातायात बाधित होना स्वाभाविक था। इस मार्ग पर भूस्खलन होने के कारण अधिशासी अभियन्ता, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग, श्रीनगर द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए मलबे के दोनों ओर से पोकलैण्ड मशीन लगाकर हिल साईड में अतिरिक्त कटान कर मार्ग को न्यूनतम संभव समय में खोल दिया गया। विकट परिस्थिति में भी कर्मचारी-श्रमिक अपनी जान की बाजी लगाकर कार्य कराते रहे। जबकि हिल साईड से लगातार पत्थर गिर रहे थे।
कहा कि उक्त स्थल के वैली साईड पर अलकनंदा नदी पर बने बांध के कारण हुए कटाव से 35-40 जमीन धंस जाने के कारण बिना कोई विस्तृत व विशिष्ट तकनीकी सुधार कार्य के बिना उपचार किया जाना संभव नहीं है। इस संबंध में डीएम अवगत होते हुए भी लगातार अधिशासी अभियन्ता, श्रीनगर पर तत्काल उपचार के लिए दबाव बनाती रही हैं। अधिशासी अभियन्ता, श्रीनगर द्वारा टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के तकनीकी परामर्श से डीपीआर विरचित कर भारत सरकार को प्रेषित की जा चुकी है जिस पर तकनीकी परीक्षण एवं धन आवंटन की कार्रवाई भारत सरकार के स्तर से होनी है।
वक्ताओं ने कहा कि परिस्थितियों में उपलब्ध वित्तीय स्वीकृति के अभाव में अधिशासी अभियन्ता, श्रीनगर द्वारा हिल साईड में यथा आवश्यक कटान कर यातायात को किसी प्रकार से सुचारु रखा गया। समस्त प्रकरण के संज्ञान होने पर भी जिलाधिकारी द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराये जाने की कार्रवाई न केवल जिलाधिकारी पौड़ी की हठधर्मिता को प्रदर्शित करता है बल्कि अंग्रेजी शासनकाल के आईसीएस अधिकारियों की प्रवृत्ति उनके व्यवहार में अंतरित होना प्रदर्शित करता है।
आपात बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जिलाधिकारी, पौड़ी गढ़वाल के द्वारा की गई कार्रवाई पूर्णतया एक तरफा, मनमानी पूर्ण एवं तानाशाही है जिसके विरोध में प्रदेश के सभी अभियन्ता 15 सितंबर को सभी जिलों में सम्बन्धित जिलाधिकारी के माध्यम से एवं दिनांक 16 सितंबर को सांसदों, विधायको के माध्यम से ज्ञापन शासन, सरकार को भेजेंगे तथा काली पट्टी पहन कर कार्य करेंगे।
फेडरेशन ने जिलाधिकारी, पौड़ी गढ़वाल द्वारा दर्ज करायी गई प्राथमिकी को तत्काल निरस्त किए जाने की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि दिनांक 16 सितंबर तक मांगे पूरी नहीं हुई तो 17 सितंबर को प्रान्तीय कार्यकारिणी द्वारा बैठक कर आंदोलन की आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
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